बाराबंकी : पूरेपनई में प्राथमिक विद्यालय बनने के लिए 2008-09 में प्रस्ताव हुआ था। प्रस्ताव होते ही तत्कालीन बीएसए ने अध्यापकों की नियुक्ति करते हुए एक घर में स्कूल संचालित करा दिया। पैसा आया लेकिन जमीन नहीं मिली। अब यहां 36 बच्चे हैं, दो अध्यापक हैं। बच्चों को सिर्फ सुविधाओं के नाम पर ड्रेस और किताबें दी जाती हैं, वह भी समय से नहीं। दस वर्षों से संचालित स्कूल की ओर जिला प्रशासन का तनिक भी ध्यान नहीं गया।

बनीकोडर के प्राथमिक विद्यालय पूरेपनई एक निजी भवन के बरामदे में संचालित है। इसी बरामदे में आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चे भी पढ़ते हैं। विद्यालय में 36 व आंगनबाड़ी केंद्र के 40 बच्चे घर के बरामदे में पढ़ते हैं। बरामदे के नीचे फर्श पर बैठकर बच्चों को पढ़ाया जाता है। घर का माहौल होने से बच्चे चुपचाप बैठे रहते हैं। खेलने को नहीं मिलता है। शौचालय की व्यवस्था न होने से गांव ये बाहर शौच जाते हैं। एमडीएम दिया नहीं जाता है।

बिना किराए पर दे रखा है भवन : सहायक अध्यापक रीता यादव ने बताया कि भवन में रसोईघर न होने के कारण मिड डे मील नहीं बनता है। भवन मालिक शिव प्रसाद ने बताया कि आज तक उन्हें किसी भी प्रकार का कोई किराया नहीं मिला। प्राथमिक विद्यालय टडिया के लिए पास हुआ था, कितु वहां जमीन नहीं मिली, तब पूरेपनई में जमीन तलाशी गई लेकिन अब उस जमीन पर कोर्ट का स्टे है।

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क्या कहते हैं जिम्मेदार

तत्कालीन भवन निर्माण प्रभारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि विद्यालय निर्माण के लिए 80 हजार रुपये आए थे। निर्माण सामग्री भी मंगवाई गई थी, किन्तु समस्त सामग्री चोरी हो गई।

बीईओ डॉ. अजीत सिंह ने बताया की विद्यालय की जमीन का मामला हाई कोर्ट में चल रहा है।

'' विद्यालय निजी भवन में कैसे चल रहा है, इसकी रिपोर्ट बीईओ से मांगा गया है, इस समस्या का जल्द ही निस्तारण किया जाएगा। ''

वीपी सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बाराबंकी।

Posted By: Jagran

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