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बाराबंकी: 128 साल पुरानी कुंवर गिरधारी सिंह की 'बारादरी' अब राजकीय धरोहर, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

Published: Thu, 01 Oct 2026 01:28 PM (IST)

बाराबंकी में 128 साल पुरानी कुंवर गिरधारी सिंह की बारादरी को राजकीय धरोहर घोषित किया गया है। उपेक्षा और जर्जरता ...और पढ़ें

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HighLights

  1. कुंवर गिरधारी सिंह की 128 वर्ष प्राचीन बारादरी राजकीय धरोहर घोषित।

  2. उपेक्षा और जर्जरता झेल रही ऐतिहासिक संरचना को मिला संरक्षण।

  3. राज्य पुरातत्व निदेशालय के प्रस्ताव को शासन ने दी मंजूरी।

संदीप जायसवाल, बाराबंकी। अवध की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का एक महत्वपूर्ण अध्याय अब नए सिरे से संवरने जा रहा है। गोकुलपुर-असेनी रियासत के तालुकेदार कुंवर गिरधारी सिंह की 128 वर्ष प्राचीन बारादरी परिसर को राजकीय धरोहर घोषित कर दिया गया है।

उपेक्षा, जर्जरता और अतिक्रमण की मार झेल रही यह ऐतिहासिक धरोहर को अब संरक्षित स्मारक का दर्जा मिला। राज्य पुरातत्व निदेशालय ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था, जिस पर मंजूरी मिल गई है। यह परिसर पर्यटन मानचित्र पर भी प्रमुख बनेगा।

अयोध्या-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग से लगभग दो किलोमीटर दूर गोकुलपुर-असेनी गांव में स्थित यह स्मारक आज भी अवध के वैभवशाली अतीत की गवाही देता है। वर्ष 1898 में कुंवर गिरधारी सिंह की स्मृति में स्वजन ने भव्य समाधि बारादरी बनवाई थी।

मंदिरनुमा स्थापत्य शैली में निर्मित इस संरचना की दीवारों और ऊपरी हिस्सों पर सैनिकों, शेरों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों की नक्काशी तत्कालीन शिल्पकला की उत्कृष्टता को दर्शाती हैं। कुंवर गिरधारी सिंह अवध के प्रभावशाली तालुकेदार और प्रमुख कायस्थ जमींदार परिवारों में गिने जाते थे।

उनकी रियासत का उल्लेख प्रसिद्ध ऐतिहासिक ग्रंथ ‘ द इलस्ट्रेटेड हिस्टोरिकल एल्बम आफ द राजा एंड तालुकेदार्स आफ ओध’ में भी मिलता है। मूल रूप से ‘असेनी स्टेट’ के नाम से प्रसिद्ध रियासत की नींव पूर्वज कुंवर बहादुर सिंह ने रखी थी।

जो अवध की प्रतिष्ठित तालुकेदारियों में शामिल हुआ। लखनऊ स्थित उनकी हवेली में अब ‘कुंवर गिरधारी इंटर कॉलेज’ संचालित हो रहा है। वर्ष 1916 के आसपास स्थापित ट्रस्ट ने शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और समाज को नई दिशा दी।

कुंवर गिरधारी सिंह के वंशज आज भी लखनऊ के अशरफाबाद क्षेत्र में निवास करते हैं। यह केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि अवध के सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक इतिहास का महत्वपूर्ण स्थल है।

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