40 लाख का पैकेज ठुकराकर यूपी की इशिता ने शुरू किया अपना ब्रांड, अब लाखों की कमाई के साथ महिलाओं को दे रहीं रोजगार
इशिता अग्रवाल ने 40 लाख का पैकेज ठुकराकर बाराबंकी में अपना रेडीमेड कपड़ों का ब्रांड 'जाविन डेशिक' शुरू किया है।

इशिता
HighLights
40 लाख का पैकेज ठुकराकर अपना ब्रांड 'जाविन डेशिक' शुरू किया।
निर्बल महिलाओं को रोजगार और प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना रहीं।
इन्वेस्टर समिट 2023 में सम्मानित, बनीं महिला उद्यमियों की प्रेरणास्रोत।
वी. राजा, बाराबंकी। दृढ़ संकल्प और सामाजिक सोच के साथ आगे बढ़ीं शहर के पीरबटावन की इशिता अग्रवाल आज निर्बल वर्ग की महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बन गईं हैं। देहरादून से एमबीए करने के बाद 40 लाख रुपये सालाना के आकर्षक पैकेज को ठुकराकर उन्होंने स्वरोजगार का रास्ता चुना और अब महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं।
एमबीए की पढ़ाई के दौरान इशिता ने अपने आसपास की उन महिलाओं की स्थिति को करीब से देखा जो आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं। वही अनुभव उनके लिए प्रेरणा बना। पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2020-21 में इशिता ने रेडीमेड कपड़ों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू की।
शुरुआत दौर में उनके साथ केवल सात महिलाएं जुड़ीं, लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़कर 40 तक पहुंच गई। इस काम में उनके पिता महेश अग्रवाल और मां पूजा अग्रवाल ने पूरा सहयोग दिया।
इशिता ने जाविन डेशिक नाम से अपना ब्रांड स्थापित किया, जिसके तहत कई तरह के रेडीमेड कपड़ों का निर्माण किया जाता है। कंपनी में शर्ट, ट्राउजर, कोट, टी-शर्ट सहित कई तरह के परिधानों की डिजाइनिंग और उत्पादन होता है। आज उनका कारोबार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे मिंत्रा, फ्लिपकार्ट और अमेजन से भी जुड़ा हुआ है।
देश में ब्रांड की पहचान बनाना लक्ष्य
इशिता का लक्ष्य केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं है। वह चाहती हैं कि उनका ब्रांड पूरे देश में पहचान बनाए और एक हजार से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जा सके। साथ ही वे देश के प्रमुख महानगरों में अपने शोरूम स्थापित करने की योजना पर भी काम कर रही हैं। इशिता अग्रवाल को वर्ष 2023 के इन्वेस्टर समिट में भी सम्मानित किया जा चुका है। महज 27 वर्ष की उम्र में वे जिले की महिला उद्यमियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
खास बात यह रही कि उस समिट में सम्मानित 215 उद्यमियों में वे अकेली महिला थीं। कंपनी में कार्यरत सीमा, अंजली, आरती, फरजाना, किरन, नेहा और शहनाज जैसी कई महिलाएं आज अपने पैरों पर खड़ी हैं।
इशिता न केवल उन्हें रोजगार देती हैं, बल्कि जिन महिलाओं को काम नहीं आता, उन्हें सिलाई, कटाई मशीन चलाने का प्रशिक्षण भी दिलाती हैं। इशिता का मानना है कि अगर सही दिशा और अवसर मिले, तो हर महिला आत्मनिर्भर बन सकती इशिता अग्रवाल आज निर्बल वर्ग की महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बन गईं हैं।
