बाराबंकी : एंबुलेंस कर्मियों का विरोध प्रदर्शन गुरुवार को भी जारी रहा। इस पर एंबुलेंस कर्मियों के खिलाफ प्रशासन सख्त हो गया। संगठन के चार पदाधिकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार करने के साथ ही 254 लोगों के खिलाफ प्रोजेक्ट मैनेजर मुकेश की तहरीर एस्मा, महामारी अधिनियम, निषेधाज्ञा उल्लंघन सहित अन्य धाराओं में मुकदमा किया है। देर शाम तक एआरटीओ की ओर से 100 चालक उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें 12-12 घंटे की ड्यूटी करनी होगी। उन्हें 450 की धनराशि दी जाएगी। सीएमओ डा. रामजी वर्मा ने बताया कि एंबुलेंस की चाबी एंबुलेंस कर्मियों से ले ली गई है। काम पर लौटना वालों को एंबुलेंस संचालित करने दी जाएगी। एंबुलेंस कर्मियों ने फूंका पुतला :

बुधवार को 15 एंबुलेंस कर्मियों की सेवा समाप्ति के बाद गुरुवार की सुबह से राजकीय इंटर कालेज में नाराज एंबुलेसकर्मी उग्र हो गए। जीवनदायिनी स्वास्थ्य विभाग 108, 102 एंबुलेंस संघ के जिलाध्यक्ष योगेश लोधी के नेतृत्व में एंबुलेंस कर्मियों ने संस्था के उपाध्यक्ष टीवीएए रेड्डी का पुतला फूंका। एसडीएम नवाबगंज अभय कुमार पांडेय, सीओ सिटी सीमा यादव ने प्रदर्शनकारी एंबुलेंस कर्मियों से वार्ता की, जोकि बेनतीजा रही। प्रभारी निरीक्षक अमर सिंह ने बताया कि प्रोजेक्ट मैनेजर मुकेश की तहरीर पर चार लोगों में अध्यक्ष योगेश लोधी, महामंत्री कृष्ण कुमार यादव, प्रवक्ता धर्मेंद्र मिश्रा, दिलीप कुमार को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा 254 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। प्रदर्शन में दिलीप कुमार, कृष्ण कुमार यादव, सोनू, अरविद शर्मा, सुरेंद्र बहादुर यादव संदीप चौहान, भरत सिंह आदि शामिल रहे। मुख्यमंत्री के खिलाफ बोलने पर अपने ही एक साथी को एंबुलेंस कर्मियों ने वहां से खदेड़ा। प्रदर्शनकारियों से मिले पूर्व मंत्री : प्रदर्शनकारी एंबुलेंस कर्मियों से मिलने पूर्व मंत्री अरविद कुमार सिंह गोप भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि 108 व 102 एंबुलेंस सेवा समाजवादी पार्टी की देन है। आप लोग लोकतांत्रिक तरीके से धरना प्रदर्शन करें और इमरजेंसी सेवा बहाल रखें। पूर्व विधायक रामगोपाल रावत, डा. कुलदीप सिंह, हशमत अली गुड्डू, रसीद, नसीम कीर्ति आदि मौजूद रहे। निजी एंबुलेंस से लाए गए मरीज : एंबुलेंस कर्मियों की ओर से की जा रही हड़ताल मरीज और तीमारदारों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। गुरुवार को भी कई मरीज व उनके साथ आए तीमारदार एंबुलेंस न मिलने के कारण परेशान दिखे। जरूरतमंद एंबुलेंस के लिए 102 व 108 पर फोन करते रहे पर उन्हें एंबुलेंस नहीं मिल पाई। ई-रिक्शा, आटो तो कोई निजी साधन से रोगी को लेकर अस्पताल पहुंचा।

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