बाराबंकी : बारिश से शहर से लेकर गांव तक बाढ़ जैसे हालात हो गए। खेत-खलिहान, तालाब, गलियां, दफ्तर सब लबालब हो गए। लोगों के घरों तक पानी भर गया है। जलनिकासी के इंतजाम बौने साबित हुए। बारिश के चलते राहत एवं बचाव के कार्य करने वाले कर्मचारी भी परेशान हैं। इस बारिश ने प्रशासन के नाला सफाई के दावों और जलनिकासी के इंतजामों की हकीकत सामने ला दी है। वहीं, सरयू नदी का जलस्तर बारिश के चलते बढ़ने लगा है। शारदा व घाघरा बैराज से नदी में पानी छोड़े जाने पर सबकी निगाहें लगी है। स्थानीय बारिश से नदी में बाढ़ का असर नहीं पड़ता है लेकिन जब पानी छोड़ा जाता है तो स्थिति बेकाबू हो जाती है। बुधवार को जलस्तर खतरे के निशान 106.070 मीटर के सापेक्ष 105.696 मीटर था जो गुरुवार को सुबह 10 बजे 105.806 मीटर पहुंच गया। धीरे-धीरे जल स्तर बढ़ रहा है। ऐसे में शुक्रवार तक जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच सकता है।

शहर में खाली स्थानों की बात तो दूर लखनऊ-अयोध्या मार्ग पर सतरिख नाका चौराहा, दशहराबाग, आजाद नगर, विजय नगर, लखपेड़ाबाग, बड़ेल, नई बस्ती सहित अन्य स्थानों पर जल भराव है। हैदरगढ़ में लखनऊ-सुलतानपुर मार्ग चौड़ीकरण के चलते नाला निर्माण अधूरा छोड़े जाने के कारण जलभराव की समस्या लगातार हो रही बारिश से और बढ़ गई है। उपनिबंधक कार्यालय, ब्लाक व सीएचसी परिसर में जलभराव हो गया। ग्राम भिखरा के नीरज सिंह ने बताया कि हाईवे निर्माण के चलते गांव के पानी की निकासी का रास्ता बंद हो गया है। ऐसे में पूरे गांव में पानी भरा है।

सिद्धौर नगर पंचायत व गांवों में जलभराव से लोग परेशान रहे। कचरे से पटी नालियों के कारण पानी की निकासी नहीं हो सकी। हुसैनपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय व शिव मंदिर सहित पूरे गांव में जलभराव से ग्रामीण परेशान हैं। उधर, सुमेरगंज कस्बे में स्थित मजार परिसर सहित कई अन्य स्थानों पर जलभराव हो गया। नगर पंचायत व तहसील प्रशासन की टीम ने जेसीबी से नाला साफ करवाकर जलनिकासी करवाई। मनीष श्रीवास्तव, लेखपाल अजयदीप मौजूद रहे।

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