विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बाराबंकी में नहर में फंसी डॉल्फिन और उसके बच्चे की मौत, कम पानी और भीषण गर्मी ने ले ली जान

Published: Thu, 21 May 2026 07:41 PM (IST)

बाराबंकी की शारदा सहायक नहर में पानी कम होने और भीषण गर्मी के कारण फंसी मां-बच्चे डॉल्फिन की मौत हो गई।

बड्डूपुर में शारदा सहायक नहर में मृत डॉल्फिन, टीएसए व वन विभाग की टीम

बड्डूपुर में शारदा सहायक नहर में मृत डॉल्फिन, टीएसए व वन विभाग की टीम

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

संवाद सूत्र, बाराबंकी। शारदा सहायक नहर में गुरुवार सुबह पानी कम होने के कारण फंसी मां और उसके बच्चे की डॉल्फिन की मौत हो गई। वन विभाग और टर्टल सर्वाइवल एलायंस (टीएसए) की टीम रेस्क्यू की तैयारी करती रही, लेकिन भीषण गर्मी और ठहरे पानी ने दोनों की जान ले ली। वन विभाग ने पशु चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया है।

बड्डूपुर के रीवा सीवा गांव के पास से निकली शारदा सहायक नहर में गुरुवार सुबह करीब साढ़े छह बजे दो डॉल्फिन दिखाई दीं। सूचना मिलने पर वन दारोगा ओपी यादव टीम के साथ मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को जानकारी दी।

वन विभाग के अनुसार, नहर में पानी बंद होने से जलस्तर घटकर करीब दो फीट रह गया था। कम पानी के कारण डॉल्फिन आगे बढ़ने में असमर्थ थीं और नीचे रेत से रगड़ खा रही थीं। रेस्क्यू के लिए लखनऊ से टीएसए की टीम बुलाई गई।

टीम ने डॉल्फिन को सुरक्षित निकालने की रणनीति बनानी शुरू की। नहर में अतिरिक्त पानी छोड़ने और शाम के समय रेस्क्यू अभियान चलाने पर विचार होता रहा। इस बीच तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया और ठहरा हुआ पानी अत्यधिक गर्म हो गया।

दोपहर करीब तीन बजे मादा डॉल्फिन ने दम तोड़ दिया, जबकि करीब डेढ़ घंटे बाद उसके बच्चे की भी मौत हो गई। टीएसए के डॉ. शैलेंद्र सिंह ने दोनों को मृत घोषित किया।

ग्रामीणों में नाराजगी

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग और बाहर से आई टीम मौके पर मौजूद रही, लेकिन डॉल्फिन को बाहर निकालने या नहर में तत्काल पानी छोड़ने के लिए प्रभावी प्रयास नहीं किए गए। लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई होती तो दोनों की जान बचाई जा सकती थी।

घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। वन रेंजर मयंक सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी नहर में पहुंची डॉल्फिनों को रेस्क्यू कर सुरक्षित रूप से घाघरा नदी में छोड़ा गया था।


नहर में मात्र दो फीट पानी बचा था। नीचे रेत से रगड़ लगने के कारण डॉल्फिन आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। भीषण गर्मी में पानी अत्यधिक गर्म हो गया था। रेस्क्यू में कम से कम एक घंटे का समय लगता और उस दौरान लगातार पानी डालना जरूरी था। इसलिए तापमान कम होने का इंतजार किया जा रहा था, लेकिन उससे पहले ही दोनों की मृत्यु हो गई। दोनों का पोस्टमार्टम पशु चिकित्सकों के पैनल से कराया जा रहा है। 

                                                                 आकाश दीप बधावन, डीएफओ, बाराबंकी

यह भी पढ़ें- कुशीनगर में खौफनाक वारदात, बाउंसर गर्लफ्रेंड ने दुपट्टे से गला घोंटकर बॉयफ्रेंड को उतारा मौत के घाट