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VIP फोन नंबर फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद BSNL ने उठाया बड़ा कदम, पूरे देश में बंद की ई-सिम स्वैपिंग सेवा

Published: Mon, 23 Feb 2026 12:32 AM (IST)Updated: Mon, 23 Feb 2026 02:12 AM (IST)

वीआईपी फोन नंबरों के ई-सिम स्वैपिंग में हो रहे फर्जीवाड़े के कारण बीएसएनएल ने यह सेवा बंद कर दी है। ...और पढ़ें

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निरंकार जायसवाल, जागरण बाराबंकी। वीआईपी फोन नंबरों के ई-सिम स्वैपिंग में हो रहा फर्जीवाड़ा प्रकाश में आने के बाद भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने इस सेवा पर रोक लगा दी है। बीएसएनएल के सॉफ्टवेयर में सेंध लगाकर ओडिशा, राजस्थान व अन्य प्रांतों में यह धोखाधड़ी किया जाना बताया जा रहा है। बाराबंकी, लखनऊ, अंबेडकरनगर और शाहजहां में इस प्रकार के मामले प्रकाश में आ चुके हैं।

बीएसएनएल बाराबंकी में चार साल पूर्व तैनात रहे अधिकारी मृगेंद्र कुमार वर्मा की लॉग इन आईडी से 101 वीआईपी फाेन नंबरों का अवैध रूप से ई-सिम स्वैपिंग कर दिया गया। वर्तमान में मृगेंद्र कुमार सीतापुर जिला में तैनात हैं। इस फर्जीवाड़ा का राजफाश तब हुआ, जब दूरसंचार जिला प्रबंधक आजमगढ़ का मोबाइल नंबर भी ई-सिम स्वैपिंग होने से उनका नंबर बंद हो गया।

उनकी शिकायत पर जब बाराबंकी बीएसएनएल में खंगाला गया तो यह जनवरी माह से शुरू हुआ यह फर्जीवाड़ा सामने आया। जनवरी 2026 में 39 और फरवरी माह 62 वीआइपी नंबरों को ई-सिम में बदल दिया गया। प्रथम दृष्टया बीएसएनएल के सॉफ्टवेयर में कमी की दृष्टिगत जूनियर टलीकॉम ऑफिसर रागिनी नाग की ओर से साइबर थाना में इसका मुकदमा दर्ज करा दिया गया।

जिला दूर संचार प्रबंधक डीके सिंह ने बताया कि अकेला बाराबंकी नहीं है, बल्कि लखनऊ में तीन, शाहजहांपुर में एक और अंबेडकनगर में भी ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं।

सर्विस प्राेवाइडर कंपनी पर संदेह

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर 2025 तक संचार आधार एप, जिससे यह प्रक्रिया होती है, उसको बाहरी कंपनी आपरेट करती थी। जनवरी 2026 से बीएसएनएल अपने सॉफ्टवेयर पर यह काम कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि पूर्व सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के कर्मचारी अथवा अधिकारी तो कहीं इस साजिश में नहीं शामिल हैं।


ई-सिम स्वैपिंग में लगातार फर्जीवाड़ा के आ रहे मामलों को दृष्टिगत बीएसएनएल ने 20 फरवरी से ई-सिम स्वैपिंग सेवा बंद कर दी है। प्रथम दृष्टया संचार आधार एप की सर्विस प्रोवाइडर कंपनी जाने के बाद ऐसा होना प्रतीत हो रहा है। उच्च स्तर से मामले की पड़ताल की जा रही है।

                                                                             डीके सिंह, दूरसंचार जिला प्रबंधक