जॉर्डन में नौकरी का झांसा देकर बाराबंकी के युवाओं से ठगे ₹10 लाख, पीड़ितों ने CM योगी से लगाई गुहार
बाराबंकी के चार युवकों को जॉर्डन में नौकरी दिलाने के नाम पर कबूतरबाजों ने 10 लाख रुपये ठग लिए।
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फर्जी वीजा और एयर टिकट के साथ मुंबई एयरपोर्ट पहुंचने पर उन्हें ठगी का पता चला।
HighLights
बाराबंकी के चार युवकों से 10 लाख की ठगी।
फर्जी वीजा-टिकट पर जॉर्डन नौकरी का झांसा दिया।
पुलिस ने 20 दिन तक मुकदमा दर्ज नहीं किया।
संवाद सूत्र, बाराबंकी। चार युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने के लिए कबूतरबाजों ने 10 लाख रुपये ले लिए। बदले में फर्जी वीजा और एयर टिकट भी दे दिए। चारों साथी बाराबंकी से विदेश जाने की तैयारी कर मुंबई एयरपोर्ट पहुंचे तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कारण यह कि एयर टिकट समेत वीजा दोनों फर्जी मिले, तब भुक्तभोगियों को ठगी का अहसास हुआ। युवक किसी तरह मुंबई से घर लौटे।
कबूतरबाजों के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। कुर्सी पुलिस ने मुकदमा नहीं दर्ज किया। बीस दिनों तक पुलिस की टालमटोल के बाद मंगलवार को पीड़ित युवक मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में कार्रवाई की मांग करने गए। कुर्सी के दौलतपुर मजरे बिसई के अरुण कुमार चौहान, धर्मेंद्र सिंह, राजेश और मोती सिंह ने फेसबुक पर विदेश में नौकरी का विज्ञापन देखा था, जिसमें लिखे मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के बाद आरोपितों ने व्हाट्सएप पर चारों के दस्तावेज मंगवाए।
करीब 8 दिन बाद उन्हें संतकबीर नगर के खलीलाबाद स्थित एआर एंटरप्राइजेज के कार्यालय बुलाया गया। यहां राजू कुमार राजभर ने जार्डन की कंपनी में अच्छी नौकरी और आकर्षक वेतन का भरोसा दिया।
युवकों ने बताया कि उनका मेडिकल कराया गया और पासपोर्ट जमा करा लिए गए। प्रत्येक से ढाई-ढाई लाख रुपये लेने की बात तय हुई। वीजा और हवाई टिकट के लिए चारों से कुल 10 लाख रुपये जमा करवा लिए गए।
चारों युवाओं को बताया कि सात अक्टूबर 2026 को मुंबई से जार्डन उन्हें रवाना होना है। सभी लखनऊ से मुंबई पहुंचे। एयरपोर्ट पर टिकट और वीजा की जांच कराई तो दोनों फर्जी निकले। पता चला कि टिकट पहले ही निरस्त कराकर उसकी रकम वापस ली जा चुकी है। पीड़ितों ने कुर्सी थाने में तहरीर दी, लेकिन 20 दिन तक मुकदमा दर्ज नहीं किया। नए आपराधिक कानून में जीरो एफआइआर का प्रावधान के बाद भी मुकदमा नहीं हुआ तो पीड़ितों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है।
मामले में एसओ कुर्सी सुदर्शन सिंह का कहना है कि मामला खलीलाबाद का है। कार्यालय वहीं है और युवकों ने रुपये भी वहीं जाकर दिए थे, इसलिए यहां मुकदमा नहीं दर्ज किया गया है।
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