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Barabanki News: विस्फोट मामले में शाह मोहम्मद को 10 वर्ष का कठोर कारावास, आठ साल पहले हुई थी घटना

09 मार्च 2016 को मंदिर के निकट गांव के रहने वाले शाह मोहम्मद व मोइनुद्दीन के मकान में विस्फोट हुआ था। दूसरी मंजिल की पूर्वी कमरे की छत व दीवार क्षतिग्रस्त हो गई थी। तत्कालीन उप निरीक्षक रवि कुमार सिंह ने मौके की जांच में काफी मात्रा में सल्फर व सवा दो किलो बारूद लोहे की छीलन व पोटाश सहित विस्फोटक बनाने की सामग्री बरामद की थी।

By Prem Shankar Edited By: Vinay Saxena Tue, 28 May 2024 10:45 AM (IST)
जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश चंद्र ने सुनाई सजा।- सांकेत‍िक तस्‍वीर

संवाद सूत्र, (बाराबंकी)। लोधेश्वर महादेवा मंदिर के पास विस्फोट मामले में शाह मोहम्मद को 10 वर्ष का कठोर कारावास की सजा जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश चंद्र ने सुनाई है।

प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता अमित अवस्थी ने बताया कि 09 मार्च 2016 को मंदिर के निकट गांव के रहने वाले शाह मोहम्मद व मोइनुद्दीन के मकान में विस्फोट हुआ था। दूसरी मंजिल की पूर्वी कमरे की छत व दीवार क्षतिग्रस्त हो गई थी। तत्कालीन उप निरीक्षक रवि कुमार सिंह ने मौके की जांच में काफी मात्रा में सल्फर व सवा दो किलो बारूद, लोहे की छीलन व पोटाश सहित विस्फोटक बनाने की सामग्री बरामद की थी।

न्यायाधीश ने अभियुक्त शाह मोहम्मद को दोषी पाते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।

छेड़खानी में तीन वर्ष का कारावास

विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट (कोर्ट 46), सुभाष चंद्र यादव ने नाबालिग से छेड़छाड़ के मामले में अभियुक्त कल्लू को तीन वर्ष के कठोर कारावास व तीन हजार रुपये अर्थदंड भुगतने की सजा सुनाई है। विशेष लोक अभियोजक अजय सिंह सिसोदिया ने बताया कि मामला कुर्सी थाने के एक गांव का है। 26 मार्च 2017 की शाम को गांव के मोहम्मद इश्तियाक व बबलू गांव की एक बालिका को मुंह दबाकर उस समय उठा लिया जब वह शौच के लिए घर से बाहर निकली थी। जज ने अभियुक्त बबलू पर दोष सिद्ध पाते हुए तीन 3 वर्ष का कठोर कारावास व तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। दूसरे आरोपित मोहम्मद इश्तियाक को संदेश के लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।

जिला बार में कंप्यूटर का उद्घाटन

बाराबंकी: जिला बार एसोसिएशन में कंप्यूटर व इंटरनेट सुविधा फिर बहाल हो गई है। सोमवार को पूर्व अध्यक्ष भारत सिंह व वरिष्ठ अधिवक्ता सालिक राम धीमान सहित अन्य मौजूद रहे। इससे अधिवक्ताओं को अब हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग व राजस्व अभिलेखों को आन लाइन देखने व उनकी प्रति निकालने में आसानी होगी।