बाराबंकी में बाढ़ प्रभावित किसानों ने पकड़ी नई राह, धान की जगह अरहर और परवल की खेती से संवार रहे तकदीर
बाराबंकी के बाढ़ प्रभावित गांवों के किसानों ने धान की जगह अरहर और परवल की खेती अपनाई है। यह नई ...और पढ़ें
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HighLights
बाढ़ प्रभावित किसानों ने धान की खेती छोड़ी।
अरहर और परवल की व्यावसायिक खेती अपनाई।
कम लागत में अच्छी आय प्राप्त कर रहे।
संवाद सूत्र, पूरेडलई (बाराबंकी)। सरयू नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ हर साल धान की फसल बर्बाद कर देती थी। अब यहां के किसानों ने परंपरा से हटकर नई राह पकड़ी है। तटवर्ती ऊंचे-नीचे खेतों में आधा दर्जन गांवों के किसान अरहर और परवल की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं।
नदी के साथ आती उपजाऊ मिट्टी जमा होने से तट के कई खेत अन्य खेतों से ऊंचे हो गए हैं। इनमें बाढ़ का पानी चढ़ता भी है तो जल्दी उतर जाता है। सिंचाई की कमी के कारण धान, गेहूं और सरसों लेना आसान नहीं रहा।
पूरेडलई के गोबरहा, इटहुआ पूरब, भैरूकोल, तेलवारी, मल्लाहन पुरवा के नंदलाल यादव, छोटेलाल निषाद, रामकुमार, कमलेश, बाबू सिंह, इंदल रावत बताते हैं कि दो साल से अरहर लगा रहे हैं। बुवाई के बाद फलन तक कोई खर्च नहीं, केवल कीट रोकथाम के लिए छिड़काव करना पड़ता है।
बाजार में अच्छी कीमत मिल रही है। कई किसान परवल, भिंडी, लौकी उगाकर अतिरिक्त आमदनी ले रहे हैं। प्रयोग सफल होने पर किसानों ने अगले सीजन में अरहर का रकबा बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
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