बाराबंकी: विश्व एड्स दिवस के मौके पर सीएमओ कार्यालय सहित जिले की सीएचसी पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को किया गया। इस दौरान स्टाल लगाने के साथ हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया।

सीएमओ कार्यालय में आयोजित गोष्ठी में सीएमओ डॉ. बीकेएस चौहान ने कहा कि एड्स दिवस की पहली बार कल्पना 1987 में अगस्त के महीने में थॉमस नेट्टर और जेम्स बन्न की ओर से गई थी। दोनों डब्ल्यूएचओ जिनेवा स्विटरजरलैंड के एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी थे। उन्होंने एड्स दिवस का अपना विचार डॉ. जॉननाथन मन्न के साथ साझा किया जिन्होंने इस विचार को स्वीकृति दे दी और वर्ष 1988 में एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। इस दिन का मुख्य का उद्देश्य इस बीमारी से ग्रसित लोगों को इसके इलाज और रोकथाम के विषय में प्रेरित करना है। पूरे विश्व भर में लोग आज के दिन लाल रीबन पहनकर एड्स से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति अपनी भावनात्मकता व्यक्त करते हैं। ऐसा लोगों में इस मुद्दे के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही रोग से लड़ रहे लोगों के लिए सहायता राशि जुटाने के लिए भी लोग इस लाल रीबन को बेचते हैं। इस मौके पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके वर्मा ने बताया कि वैश्विक एकजुटता साझा जिम्मेदारी विषय पर गोष्ठी सीएचसी हैदरगढ़, रामसनेहीघाट, फतेहपुर, सूरतगंज पर कोविड नियमों का पालन करते हए आयोजित की गई। स्टाल भी लगाया गया। सीएमओ कार्यालय में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से संचालित किए जाने वाले सभी वीएचएनडी सत्र पर सभी गर्भवतियों की एचआइवी व सिफलिस जांच पश्चात जन्में बच्चे को विशेष देखरेख में रखा जाता है। जिसमें माता, बच्चे एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को एचआईवी एवं सिफलिस के संक्रमण से बचा जाता है।

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