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यूपी के माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों के बनेंगे स्वास्थ्य कार्ड, कॉलेजों में 'हेल्थ क्लब' का होगा गठन

Published: Fri, 11 Sep 2026 03:46 PM (IST)

माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के स्वास्थ्य की विशेष निगरानी के लिए अब हेल्थ कार्ड बनाए जाएंगे और प्रत्येक विद्यालय में हेल्थ क्लब का गठन होगा।

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HighLights

  1. प्रत्येक छात्र का हेल्थ कार्ड बनेगा, स्वास्थ्य की निगरानी होगी।

  2. हर विद्यालय में हेल्थ क्लब का गठन, जागरूकता बढ़ाएगा।

  3. किशोरावस्था की समस्याओं और स्वच्छता पर विशेष ध्यान।

जागरण संवाददाता, बांदा। माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के स्वास्थ्य की अब विशेष निगरानी होगी। इसके लिए शासन के निर्देश पर हर विद्यार्थी का हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा और प्रत्येक विद्यालय में हेल्थ क्लब का गठन किया जाएगा।

स्वास्थ्य संबंधी शिविर का आयोजन कर साफ-सफाई से रहने समेत होने वाली विभिन्न बीमारियों के बारे में बताया जाएगा। स्वास्थ्य क्लब में पांच प्रमुख सदस्य शामिल होंगे, जो बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेंगे।

मंडल में कुल 553 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं, जिनमें बांदा के 173, चित्रकूट के 110, हमीरपुर के 167 और महोबा के 103 विद्यालय शामिल हैं। इनमें करीब चार लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी प्रधानाचार्यों को हेल्थ क्लब गठन के निर्देश जारी कर दिए हैं।

क्लब के गठन के बाद विद्यालय स्तर पर स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बच्चों का चिकित्सीय परीक्षण कर हेल्थ कार्ड तैयार किया जाएगा। इस कार्ड में बच्चे की ऊंचाई, वजन, दृष्टि, दांत, हीमोग्लोबिन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दर्ज होगी, ताकि समय-समय पर उसके स्वास्थ्य की स्थिति पर नजर रखी जा सके।

ऐसी होगी हेल्थ क्लब की संरचना

स्वास्थ्य क्लब में पांच प्रमुख सदस्य शामिल होंगे। इसके अलावा प्रत्येक कक्षा से छात्र प्रतिनिधि जोड़े जाएंगे। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्य अधिकारी या एएनएम को क्लब का मुख्य संरक्षक नियुक्त किया जाएगा, जबकि संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य क्लब संरक्षक होंगे।

विद्यालय के दो शिक्षकों को हेल्थ ब्रिगेडियर की जिम्मेदारी दी जाएगी, जो बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेंगे। प्रत्येक कक्षा से दो विद्यार्थियों - एक छात्र और एक छात्रा को हेल्थ कैप्टन बनाया जाएगा। ये कैप्टन अपने सहपाठियों को साफ-सफाई, संतुलित आहार और शारीरिक बदलावों के बारे में जानकारी देंगे।

किशोरावस्था की समस्याओं पर होगा फोकस

कक्षा छह से 12 तक के बच्चे किशोरावस्था से गुजरते हैं, इस दौरान उनमें शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं। कई बार जानकारी के अभाव में बच्चे तनाव और भ्रम की स्थिति में रहते हैं। हेल्थ क्लब और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से उन्हें इन बदलावों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी दी जाएगी। विशेष रूप से छात्राओं को माहवारी स्वच्छता, एनीमिया और पोषण के बारे में जागरूक किया जाएगा।

की जाएगी काउंसलिंग, संतुलित दिनचर्या पर रहेगा जोर

बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत, मोटापा, आंखों की कमजोरी और मानसिक तनाव जैसे मुद्दों पर भी काउंसलिंग की जाएगी। शिविर में डाक्टर बच्चों को योग, व्यायाम और संतुलित दिनचर्या का महत्व भी समझाएंगे। गंभीर बीमारी पाए जाने पर बच्चे को सीएचसी या जिला अस्पताल रेफर किया जाएगा और उसका फालोअप भी हेल्थ कार्ड के माध्यम से किया जाएगा।

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अभिभावकों को भी किया जाएगा जागरूक

इस योजना का एक उद्देश्य अभिभावकों को भी जागरूक करना है। हेल्थ कार्ड के जरिए माता-पिता को अपने बच्चे के स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। विद्यालय प्रबंधन समय-समय पर अभिभावक बैठक बुलाकर स्वास्थ्य संबंधी सुझाव देगा।

सभी विद्यालयों को इसी माह में क्लब गठन की रिपोर्ट और शिविर आयोजन का कैलेंडर उपलब्ध कराने को कहा गया है। इस पहल से न सिर्फ बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि स्कूलों में उपस्थिति और पढ़ाई के स्तर में भी सुधार की उम्मीद है।

राजेश कुमार वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा