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UP Codeine Syrup Racket: कोडीन सीरप कारोबार के सट्टेबाजी से जुड़े तार, 3 मेडिकल एजेंसियों और औषधि विभाग जांच के घेरे में

Published: Wed, 09 Sep 2026 07:39 PM (IST)

यूपी में कोडीनयुक्त कफ सीरप के अवैध कारोबार के तार आईपीएल सट्टेबाजी से जुड़े हैं, जिसमें मुख्य आरोपी प्रवीण उर्फ ...और पढ़ें

अतर्रा में पांच सितंबर को श्याम मेडिकल एजेंसी में पुलिस बल के साथ जांच करते औषधि निरीक्षक दिव्य प्रकाश मौर्य व सीओ पुलिस बल के साथ। जागरण व प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता । इंटरनेट मीडिया

अतर्रा में पांच सितंबर को श्याम मेडिकल एजेंसी में पुलिस बल के साथ जांच करते औषधि निरीक्षक दिव्य प्रकाश मौर्य व सीओ पुलिस बल के साथ। जागरण व प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता । इंटरनेट मीडिया 

HighLights

  1. यूपी में कोडीनयुक्त कफ सीरप का अवैध कारोबार।

  2. मुख्य आरोपी प्रवीण का आईपीएल सट्टेबाजी से संबंध।

  3. तीन मेडिकल एजेंसियां, औषधि विभाग जांच के घेरे में।

जागरण टीम, बांदा। यूपी में कोडीनयुक्त कफ सीरप का अवैध कारोबार चल रहा है। आगरा से पकड़े गए कोडीन युक्त सीरप के अवैध कारोबार कारगना प्रवीण सहित इस रैकेट से जुड़े लोगों के तार सट्टेबाजी से भी है। वहीं, तीन मेडिकल एजेंसियों और औषधि विभाग की मिलीभगत भी सामने आई है।

कोडीनयुक्त कफ सीरप के अवैध कारोबार में गिरफ्तार किए गए लोगों के तार अब आईपीएल मैचों में सट्टेबाजी से भी जुड़ गए हैं। अतर्रा निवासी आरोपित प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता को करीब डेढ़ साल पहले आइपीएल मैचों में सट्टेबाजी में पुलिस ने पकड़ा था। प्रतिबंधित दवाओं के कारोबार में उसका नाम सामने आने के बाद पुलिस उसके पुराने संपर्कों व आर्थिक गतिविधियों की पड़ताल कर रही है।

कोडीनयुक्त सीरप मामले में धीरेंद्र, सरगना प्रियांशु उर्फ किशन गुप्ता, रोहित पांडेय व शेखर भी जेल भेजे जा चुके हैं। एसपी पलाश बंसल ने बताया कि 27 मई 2025 को विनोद गुप्ता की शिकायत पर आइपीएल मैचों में सट्टेबाजी की जांच में कृष्णा निषाद व प्रवीण को गिरफ्तार किया गया था। प्रवीण व कोडीनयुक्त सीरप खपाने वाले गैंग के सदस्यों की गतिविधियां भी देखी जा रही हैं। तीन मेडिकल एजेंसियों की भी संलिप्तता मिली है। इन्हें बुधवार को औषधि विभाग ने भी नोटिस दी है।

अतर्रा की लखन कालोनी निवासी प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता के लिए कोडीनयुक्त कफ सीरप के अवैध कारोबार का मामला पहली पुलिस कार्रवाई नहीं है। पुलिस के अनुसार 27 मई 2025 को विनोद गुप्ता की शिकायत पर आईपीएल सट्टेबाजी की जांच शुरू हुई थी। कार्रवाई के दौरान कृष्णा निषाद और अतर्रा, लखन कालोनी निवासी प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। दोनों के विरुद्ध सट्टेबाजी का मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई थी। उस समय हुई पुलिस कार्रवाई के बाद भी प्रवीण की गतिविधियों पर अब नए सिरे से सवाल उठ रहे हैं।

कोडीन सीरप के मामले में प्रवीण की गिरफ्तारी के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सट्टेबाजी के मामले में कार्रवाई के बाद वह किन लोगों के संपर्क में रहा। उसके पुराने मोबाइल नंबरों और संपर्कों के साथ आर्थिक लेनदेन की भी जानकारी जुटाई जा रही है। वर्तमान मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपितों से उसके पुराने संबंध रहे हैं या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि प्रवीण प्रतिबंधित दवाओं के कारोबार से कब और कैसे जुड़ा। अतर्रा थाना प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि प्रवीण के विरुद्ध 27 मई 2025 को आईपीएल सट्टेबाजी का मुकदमा दर्ज हुआ था। उसकी अन्य गतिविधियों और संपर्कों की जांच की जा रही है। एसपी पलाश बंसल ने बताया कि आरोपितों के पुराने मामलों की भी जांच कराई जाएगी।

सट्टेबाजी के बाद अब कोडीन सीरप के कारोबार में फंसा प्रवीण

अतर्रा की लखन कालोनी निवासी प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता के लिए कोडीनयुक्त कफ सीरप के अवैध कारोबार का मामला पहली पुलिस कार्रवाई नहीं है। करीब डेढ़ साल पहले भी वह आईपीएल सट्टेबाजी के मामले में गिरफ्तार हो चुका है। अब प्रतिबंधित दवाओं के कारोबार में नाम सामने आने के बाद पुलिस उसके पुराने संपर्कों, आर्थिक लेनदेन और गतिविधियों को भी खंगाल रही है। तीन सितंबर की सुबह बिसंडा क्षेत्र के ग्राम पुनाहुर के पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर एसटीएफ और बिसंडा पुलिस ने डीसीएम से 250 पेटी में 30 हजार बोतल कोडीनयुक्त कफ सीरप पकड़ा था।

ये चार लोग पकड़े गए थे

मौके से चार आरोपित गिरफ्तार किए गए थे। इनमें अतर्रा, लखन कालोनी निवासी प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता का नाम भी जांच आगे बढ़ने पर सामने आया। मौके से गिरफ्तार आरोपितों में बिसंडा, ग्राम नहर पुरवा निवासी धीरेंद्र पुत्र भगवत प्रसाद, अतर्रा निवासी प्रियांशु उर्फ किशन गुप्ता, अतर्रा निवासी रोहित पांडेय पुत्र कल्लूराम और बहादुरगढ़, ग्राम भैना, जिला हापुड़ निवासी शेखर पुत्र राजकुमार शामिल थे। जांच आगे बढ़ने पर प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता भी मामले में गिरफ्तार हुआ।

अब पुराने संपर्कों की कुंडली खंगाल रही पुलिस

कोडीन सीरप के मामले में प्रवीण की गिरफ्तारी के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सट्टेबाजी के मामले में कार्रवाई के बाद वह किन लोगों के संपर्क में रहा। उसके पुराने मोबाइल नंबरों और संपर्कों के साथ आर्थिक लेनदेन की भी जानकारी जुटाई जा रही है। वर्तमान मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपितों से उसके पुराने संबंध रहे हैं या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि प्रवीण प्रतिबंधित दवाओं के कारोबार से कब और कैसे जुड़ा। अतर्रा थाना प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि प्रवीण के विरुद्ध 27 मई 2025 को आईपीएल सट्टेबाजी का मुकदमा दर्ज हुआ था। उसकी अन्य गतिविधियों और संपर्कों की जांच की जा रही है। एसपी पलाश बंसल ने बताया कि आरोपितों के पुराने मामलों की भी जांच कराई जाएगी।

तीनों मेडिकल एजेंसी संचालकों को औषधि विभाग ने दिया नोटिस

कोडीन कफ सीरप तस्करी के मामले में अतर्रा की तीन मेडिकल एजेंसियों के संचालकों पर औषधि विभाग ने शिकंजा कस दिया है। सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार ने बुधवार नौ सितंबर को तीनों संचालकों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है। नोटिस में औषधि निरीक्षक दिव्य प्रकाश मौर्य की जांच रिपोर्ट के आधार पर तीन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद लाइसेंस निरस्तीकरण समेत अन्य विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

इन तीनों का नाम आया सामने

जांच में मुख्य आरोपित प्रियांशु उर्फ किशन गुप्ता की श्याम मेडिकल एजेंसी, रोहित पांडेय के पिता कल्लूराम पांडेय के नाम संचालित श्रीराम मेडिकल एजेंसी और प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता की मामा मेडिकल एजेंसी का नाम सामने आया। इसके बाद पांच सितंबर को औषधि निरीक्षक दिव्य प्रकाश मौर्य ने पुलिस के साथ तीनों एजेंसियों का निरीक्षण किया। प्रत्येक एजेंसी से दो-दो दवाओं के नमूने लेकर मथुरा स्थित राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला भेजे गए।

जवाब मांगा गया है

सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार ने बताया कि निरीक्षक की रिपोर्ट में तीनों एजेंसियों का लाइसेंस सुरक्षित और प्रदर्शित स्थिति में नहीं पाया गया। कुछ दवाओं के बिल भी संचालक प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके अलावा कोडीन कफ सीरप की तस्करी से संबंधित भूमिका को लेकर भी जवाब मांगा गया है। तीनों संचालकों को बुधवार को उनके पते पर नोटिस डाक से भेजे गए हैं। एक सप्ताह में जवाब मिलने के बाद रिपोर्ट और अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसमें लाइसेंस निरस्तीकरण समेत अन्य विभागीय कार्रवाई शामिल हो सकती है।

कोडीन तस्करी का सरगना औषधि विभाग की मिलीभगत से चलाता रहा मेडिकल स्टोर

कोडीनयुक्त कफ सीरप की तस्करी में मुख्य सरगना के रूप में सामने आए अतर्रा निवासी प्रियांशु उर्फ किशन गुप्ता की श्याम मेडिकल एजेंसी को लेकर औषधि विभाग की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि अतर्रा बस स्टैंड के पास संचालित एजेंसी थोक लाइसेंस पर चलती रही और यहां फुटकर दवाओं की बिक्री भी होती रही। बस स्टैंड में दुकान खुले स्थान पर होने के कारण यहां आने-जाने वालों के लिए कारोबार छिपा नहीं था, फिर भी विभागीय निरीक्षण में अनियमितता क्यों नहीं पकड़ी गई, यह बड़ा सवाल है।

दोनों जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर सवाल

अतर्रा क्षेत्र में दवा दुकानों और मेडिकल एजेंसियों के निरीक्षण की जिम्मेदारी औषधि निरीक्षक दिव्यप्रकाश मौर्या की है। वहीं सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार के स्तर से विभागीय निगरानी और कार्रवाई की जाती है। ऐसे में सवाल है कि बस स्टैंड के पास खुलेआम संचालित एजेंसी में कारोबार का तरीका इन अधिकारियों के निरीक्षण में क्यों नहीं आया। क्या पूर्व में एजेंसी का निरीक्षण हुआ था? यदि हुआ तो क्या स्टाक और खरीद-बिक्री के बिलों का मिलान किया गया? यदि फुटकर बिक्री दिखी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?


ये हैं जिम्मेदार

  • दिव्यप्रकाश मौर्या - औषधि निरीक्षक
  • वीरेंद्र कुमार- सहायक आयुक्त, औषधि


तीनों मेडिकल एजेंसियों से संबंधित सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। थोक लाइसेंस होने के बावजूद फुटकर बिक्री क्यों की जा रही थी, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- वीरेंद्र कुमार, सहायक आयुक्त- औषधि

 

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