बांदा में बोरवेल बना मौत का कुआं, ट्यूबवेल के 20 फीट गहरे कुएं में उतरे दो किसान, दोनों की जहरीली गैस से मौत
बांदा के अजीतपारा गांव में बोरवेल की मोटर ठीक करते समय दो किसान जहरीली गैस की चपेट में आ गए। ...और पढ़ें

कृष्ण कुमार व लल्लू की फाइल फोटो। स्वजन
HighLights
बिसंडा के अजीतपारा गांव की घटना, तीन घंटे रेस्क्यू कर दोनों को रस्सी के सहारे बाहर निकाला गया
कुएं में लगी मोटर का पंखा बनाने के लिए उतरे थे, किसान को बचाने में चपेट में आया खेत मालिक का पुत्र
जागरण संवाददाता, बांदा। बिसंडा के अजीतपारा गांव में शुक्रवार दोपहर ट्यूबवेल के 20 फीट गहरे गहरे सूखे कुएं में उतरे बटाईदार किसान और खेत मालिक के पुत्र की जहरीली गैस मीथेन की चपेट में आने से मौत हो गई। ट्यूबवेल तक पहुंचने के लिए रास्ता कीचड़ भरा होने के कारण पुलिस टीम करीब डेढ़ घंटे बाद मौके पर पहुंच सकी। दोनों को निकालने के लिए आक्सीजन सिलिंडर मंगवाना पड़ा।
पुलिस ने तीन घंटे मशक्कत कर दोनों को रस्सी के सहारे बाहर निकाला और उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिसंडा ले जाया गया। वहां डाक्टर ने दोनों को मृत बता दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
शिवनारायण सिंह के खेत में ट्यूबवेल के कुएं में लगी मोटर का पंखा खराब हो गया था। दोपहर करीब 12 बजे पंखा बनाने के लिए 45 वर्षीय बटाईदार लालू कुएं में उतरे तो वह जहरीली गैस की चपेट में आने से अचेत हो गए। अनुमान है कि बटाईदार की चीख सुनकर खेत मालिक के 44 वर्षीय पुत्र कृष्ण कुमार रस्सी के सहारे कुएं में उतरे तो वह भी अचेत होकर वहीं गिर गए।
दोनों के नहीं दिखने पर आसपास काम कर रहे किसान कुएं के पास पहुंचे। जब कुएं में झांक कर देखा तो दोनों अचेत अवस्था में पड़े मिले। ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सीओ कृष्णकांत त्रिपाठी व चौकी इंचार्ज गौरव मिश्रा, डायल 112 कर्मी मौके पर पहुंचे।
करीब ढाई बजे टीम ने रेस्क्यू शुरू कराया। दोनों को बाहर निकाल कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिसंडा भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने पहले लालू को मृत घोषित कर दिया। बाद में कृष्ण कुमार को मृत घोषित किया। स्वजन जीवित होने की उम्मीद पर कृष्ण कुमार को रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज के अस्पताल ले गए। वहां भी डाक्टर ने मृत बता दिया।
सीओ ने बताया कि दोनों किसानों की मौत प्रथम दृष्टया जहरीली मीथेन गैस की चपेट में आने से प्रतीत हो रही है। ग्रामीणों ने पहले उनकी हालत ठीक होने की सूचना दी थी। रेस्क्यू कर उन्हें बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
पंडित जेएन पीजी कालेज, बांदा की रसायन विज्ञान की प्रोफेसर छवि पुरवार ने बताया कि मीथेन गैस अपने आप में अत्यधिक विषैली नहीं होती, लेकिन बंद या सीमित स्थानों पर यह हवा से आक्सीजन को विस्थापित कर देती है, जिससे दम घुटने और बेहोशी का खतरा पैदा होता है। इससे बचाव के लिए हवा की गुणवत्ता की जांच करें और उस क्षेत्र को तुरंत खाली कर दें। चक्कर आना, सिरदर्द या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखने पर डाक्टर से संपर्क करें।
