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यूपी के बांदा जिले में साइबर ठगी के शिकार हुए लोगों को मिलेगी राहत, अब बैंक भी होंगे जिम्मेदार

Published: Sun, 01 Nov 2026 06:30 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने साइबर ठगी में बैंक की लापरवाही पर उन्हें जिम्मेदार ठहराने को कहा है, जिससे पीड़ितों को राहत मिल सकेगी।

आरबीआई नए नियम बना रहा है, जिनके तहत संदिग्ध लेनदेन पर रोक लगेगी और बैंक खाताधारक से पुष्टि करेंगे।

आरबीआई नए नियम बना रहा है, जिनके तहत संदिग्ध लेनदेन पर रोक लगेगी और बैंक खाताधारक से पुष्टि करेंगे।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को साइबर ठगी में लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया।

  2. आरबीआई नए नियम बना रहा है, 31 दिसंबर तक लागू होंगे।

  3. बैंकों की लापरवाही से ठगी पर पीड़ितों को नुकसान की भरपाई मिलेगी।

जागरण संवाददाता, बांदा। साइबर ठगी में पैसा गंवाने वाले लोगों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। अब ठगी होने पर बैंक भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकेंगे। यदि बैंक की लापरवाही से किसी व्यक्ति के खाते से रुपये निकाल लिए जाते हैं तो बैंक को नुकसान की भरपाई करनी पड़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) से बैंकों की जवाबदेही तय करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है।

बांदा जिले में भी इस साल साइबर ठग लोगों के छह करोड़ 33 लाख 89 हजार 415 रुपये हड़प चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने डिजिटल ठगी के मामलों की सुनवाई की। पीठ ने कहा कि यदि बैंक जरूरी सावधानी और जांच करने में चूक करते हैं और इसका फायदा उठाकर ठग लोगों के खाते से रुपये निकाल लेते हैं तो बैंक को पीड़ित को हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। अदालत ने आरबीआइ से पूछा कि साइबर ठगी रोकने और पीड़ितों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

आरबीआइ ने बताया कि इस संबंध में नए नियम तैयार किए जा रहे हैं। इनके तहत खाते में होने वाले बड़े या संदिग्ध लेनदेन पर कुछ समय के लिए रोक लगाई जा सकेगी। बैंक ऐसे लेनदेन की पुष्टि खाताधारक से करेंगे। डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी का संदेह होने पर नजदीकी पुलिस थाने को भी सूचना दी जा सकेगी। इन नियमों को 30 नवंबर तक अधिसूचित करने और 31 दिसंबर तक लागू करने की तैयारी है।

बांदा जिले में वर्ष 2026 के दौरान साइबर ठगी के 15 मुकदमे दर्ज हुए हैं। इनमें 21 आरोपित गिरफ्तार किए गए और आठ मामलों का निस्तारण हुआ है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जिले से 2703 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 1977 बंद हो चुकी हैं, जबकि 681 पर कार्रवाई चल रही है।

पुलिस ने ठगी की 1 करोड़ 99 लाख 45 हजार 972 रुपये की रकम पीड़ितों को वापस कराई है। इसके अलावा तीन करोड़ 46 लाख 45 हजार 291 रुपये होल्ड कराए गए हैं। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 नंबर पर फोन करने और बैंक को सूचना देने से रकम को दूसरे खातों में जाने से रोकने में मदद मिल सकती है।

बांदा में साइबर थाना प्रभारी सुखराम सिंह ने बताया कि साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों की रकम होल्ड कराने के बाद उसे वापस दिलाने के लिए पुलिस लगातार प्रयास करती है। इसके लिए संबंधित बैंकों को पत्र लिखकर होल्ड रकम पीड़ितों के खाते में वापस करने की मांग की जाती है।

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