LPG Price Hike: रसोई पर मिडिल ईस्ट जंग की मार! यूपी में बढ़े LPG सिलेंडर के दाम, जानें नया रेट
अमेरिका-ईरान तनाव के कारण घरेलू रसोई गैस सिलिंडर 60 रुपये महंगा होकर 945 रुपये का हो गया है, जबकि व्यावसायिक सिलिंडर 115 रुपये बढ़कर 1932 रुपये का हो गया है।
-1772893863003_m.webp)
HighLights
घरेलू एलपीजी सिलिंडर 60 रुपये महंगा होकर 945 का हुआ।
व्यावसायिक सिलिंडर 115 रुपये बढ़कर 1932 रुपये का हुआ।
अमेरिका-ईरान तनाव के कारण रसोई बजट पर सीधा असर।
जागरण संवाददाता, बांदा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। देश भर में घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। 885 रुपये का मिलने का 14.2 किलो वाला घरेलू सिलिंडर करीब 945 रुपये का हो गया है। वहीं 19 किलो वाला व्यावसायिक सिलिंडर पहले 1817 रुपये का था जो 115 रुपये महंगा होकर अब 1932 रुपये का हो गया है।
नई दरें सात मार्च यानी शनिवार से लागू हो गई हैं। कीमत बढ़ने से जिले के लाखों उपभोक्ताओं के रसोई बजट पर असर पड़ने की आशंका है। इससे पहले जिले में 14.2 किलो का घरेलू सिलिंडर लगभग 884.50 (885) रुपये में मिल रहा था और दिसंबर 2025 से इसकी कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ था। अब 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद इसकी कीमत करीब 945 रुपये के आसपास पहुंच गई है।
जिले में कितनी है मांग व खपत
बांदा जिला पूर्ति अधिकारी कयामुद्दीन अंसारी ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और सामान्य कनेक्शन मिलाकर कुल लगभग 4.06 लाख घरेलू गैस उपभोक्ता हैं। इनमें 2.46 लाख उपभोक्ता प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत हैं, जबकि करीब 1.60 लाख सामान्य (नान-उज्ज्वला) उपभोक्ता शामिल हैं। औसतन एक परिवार लगभग डेढ़ से दो महीने में एक सिलिंडर का उपयोग करता है। इस आधार पर जिले में हर महीने करीब 1.8 से 2 लाख सिलिंडर की खपत मानी जाती है। वहीं सालाना खपत लगभग 20 से 24 लाख सिलिंडर के आसपास आंकी जाती है।
बांदा में 41 एजेंसियां
जिले में इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस की कुल 41 एजेंसियां उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर की आपूर्ति कर रही हैं। इन्हीं एजेंसियों के माध्यम से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग के अनुसार सिलिंडर की आपूर्ति की जाती है। जरूरत पड़ने पर कंपनियों से अतिरिक्त रैक मंगाकर आपूर्ति संतुलित की जाती है। स्थानीय बाजार के अनुसार घरेलू सिलिंडर की कीमत दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक लगभग 884.50( 885) रुपये पर स्थिर रही थी। यानी करीब तीन महीने बाद अब एक साथ 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
व्यवसायिक सिलिंडर महंगा होने का असर
व्यवसायिक सिलिंडर भी 115 रुपये महंगा होने से होटल, ढाबा और रेस्तरां संचालकों की लागत बढ़ेगी। कारोबारियों का कहना है कि इससे खाने-पीने की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में एलपीजी की मांग लगातार बढ़ रही है। देश में घरेलू उत्पादन सीमित है और जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है। ऐसे में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव या युद्ध जैसी परिस्थितियों का सीधा असर घरेलू गैस सिलिंडर की कीमतों पर पड़ता है। जिले के उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले से महंगाई के कारण घरेलू बजट प्रभावित है और अब गैस सिलिंडर महंगा होने से रसोई का खर्च और बढ़ जाएगा। कई लोगों ने सरकार से आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी या अन्य उपाय करने की मांग भी की है।
बांदा में एलपीजी की स्थिति (अनुमानित)
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| कुल गैस एजेंसियां | 41 |
| पीएम उज्ज्वला योजना के उपभोक्ता | लगभग 2.46 लाख |
| सामान्य (नान-उज्ज्वला) उपभोक्ता | लगभग 1.60 लाख |
| कुल गैस उपभोक्ता | लगभग 4.06 लाख |
| मासिक खपत | लगभग 1.8 – 2 लाख सिलिंडर |
| वार्षिक खपत | लगभग 20 – 24 लाख सिलिंडर |
| औसत उपयोग | एक परिवार 1.5 – 2 माह में एक सिलिंडर |
इस समय जो युद्ध चल रहा है उसका असर हमारे देश पर भी पड़ रहा है। ऐसे समय में हम अपने देश के साथ खड़े हैं, लेकिन महंगाई बढ़ने से रसोई का खर्च भी बढ़ेगा। गैस सिलिंडर महंगा होने के साथ अन्य जरूरी सामान भी महंगे हो सकते हैं, जिससे परिवार का खर्च चलाना और मुश्किल हो जाएगा।
रामचंद्र नामदेव, बबेरूईरान-इजरायल के बीच युद्ध का असर अब महंगाई पर दिखने लगा है। घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमत अचानक बढ़ने से रसोई का बजट बिगड़ जाएगा। पहले से ही घर का खर्च संभालना मुश्किल हो रहा था, अब गैस महंगी होने से परेशानी और बढ़ेगी।
प्रीति, लालथोक, अतर्रापहले से ही दूध, चीनी और चायपत्ती के दाम बढ़े हुए हैं, ऊपर से गैस सिलिंडर भी महंगा हो गया है। इससे चाय बनाना महंगा पड़ रहा है। यदि यही स्थिति रही तो या तो चाय के दाम बढ़ाने पड़ेंगे या फिर मुनाफा कम करना पड़ेगा।
आशीष सिंह, चाय दुकान संचालक, तिंदवारी
गैस सिलिंडर महंगा होने से सबसे ज्यादा असर मध्यम और गरीब परिवारों पर पड़ता है। रसोई का बजट पहले ही सीमित रहता है, ऐसे में कीमत बढ़ने से घरेलू खर्च संभालना कठिन हो जाता है। सरकार को आम लोगों को कुछ राहत देने पर विचार करना चाहिए।
सुनीता देवी, फतपुरवा
