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देश के सामने चमकी कालिंजर की पहचान, अब 7.44 करोड़ से संवरेगा कालिंजर दुर्ग मार्ग

Published: Tue, 06 Oct 2026 03:30 PM (IST)

गणतंत्र दिवस 2026 पर उत्तर प्रदेश की झांकी में पहचान बनाने वाले कालिंजर दुर्ग तक पहुंचने वाले पहाड़ी मार्ग को 7.44 करोड़ रुपये से संवारा जा रहा है।

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HighLights

  1. कालिंजर दुर्ग मार्ग 7.44 करोड़ रुपये से संवारा जा रहा है।

  2. सड़क चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण और सुरक्षा कार्य किए जाएंगे।

  3. परियोजना का संशोधित लक्ष्य अब 15 मार्च 2027 है।

जागरण संवाददाता, बांदा। गणतंत्र दिवस-2026 पर कर्तव्य पथ पर उत्तर प्रदेश की झांकी में शामिल होकर कालिंजर दुर्ग ने देशभर में पहचान बनाई। अब दुर्ग तक पहुंचने वाले दो किलोमीटर लंबे पहाड़ी मार्ग को 7.44 करोड़ रुपये से संवारा जा रहा है। बघेलाबारी मोड़ से कालिंजर दुर्ग तक किला कालिंजर मार्ग के इस हिस्से का चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण और रोड सेफ्टी का कार्य कराया जाएगा।

इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित व सुगम आवागमन मिल सकेगा। विंध्य पर्वतमाला पर स्थित कालिंजर दुर्ग बुंदेलखंड की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है। चंदेलकालीन दुर्ग में स्थित नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में सावन, महाशिवरात्रि समेत अन्य अवसरों पर कई राज्यों से श्रद्धालु भी पहुंचते हैं।

वर्तमान में पहाड़ी मार्ग की चौड़ाई केवल 3.75 मीटर है। संकरी सड़क के कारण एक समय में एक ही वाहन निकल पाता है। परियोजना के तहत इसे करीब 5.5 मीटर चौड़ा किया जाएगा और दोनों किनारों पर इंटरलाकिंग लगाई जाएगी।

वर्षा में पहाड़ से मिट्टी, पत्थर और बोल्डर गिरने से मार्ग क्षतिग्रस्त होने तथा आवागमन बाधित होने की समस्या को देखते हुए जरूरत के अनुसार तीन मीटर या उससे अधिक ऊंचाई की रिटेनिंग वाल बनाई जाएगी। खतरनाक मोड़ों पर क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे और पुरानी सड़क पर सील कोटिंग होगी। वर्तमान में पहाड़ के किनारे रिटेनिंग वाल और सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं। इसके बाद चौड़ीकरण और डामरीकरण के कार्य किए जाएंगे।

16 मार्च को प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी

परियोजना को 16 मार्च 2026 को प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी और पहले 20 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य था। दुर्ग पुरातत्व के संरक्षित क्षेत्र में होने के कारण एनओसी जरूरी थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से 10 जुलाई 2026 को अनुमति मिलने के बाद रिटेनिंग वाल के लिए खोदाई शुरू हुई। एनओसी में देरी के कारण अब संशोधित लक्ष्य 15 मार्च 2027 निर्धारित किया गया है। निर्माण कार्य मेसर्स मदन कंस्ट्रक्शन, कमासिन करा रहा है।

वर्षा में पहाड़ से मिट्टी-पत्थर आने से आवागमन प्रभावित होता है। रिटेनिंग वाल बनने से समस्या कम होगी
- नरेंद्र त्रिपाठी, कालिंजर

सड़क संकरी होने से जाम लगता था। मार्ग बेहतर होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
-अरविंद छिरौलिया, निदेशक, कालिंजर शोध संस्थान

एनओसी के बाद काम शुरू है। पहले सुरक्षा कार्य, फिर चौड़ीकरण कराया जाएगा।
-सतीश रावत, अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग, बांदा

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