जागरण संवाददाता, बांदा : ग्राम पंचायतों में विकास कार्य अब गति पकड़ रहे हैं। साथ ही अधिकारियों द्वारा स्थलीय निरीक्षण शुरू कर दिया गया है। ग्राम पंचायत बहेरी में जिला पंचायतराज अधिकारी ने विभागीय टीम के साथ निर्माणाधीन नाली व अन्य विकास कार्यों का निरीक्षण कर मानक व गुणवत्तापूर्ण कार्य कराने के निर्देश दिए हैं।

ग्राम पंचायत बहेरी में पंचायत भवन व सामुदायिक शौचालय के पास नाली व सीसी रोड का निर्माण चल रहा है। जिला पंचायतराज अधिकारी सर्वेश कुमार पांडेय ने जिला सलाहकार नागेंद्र सिंह व विशाल के साथ निर्माणाधीन नाली का मानक देखने के लिए अपने सामने माप करायी। गुणवत्ता देखी। साथ में बन रही सीसी रोड को भी देखा। डीपीआरओ ने बताया कि नाली की गुणवत्ता ठीक पायी गई है। पास में लगे हैंडपंप के जल निकासी वाली नाली को भी इसी में जोड़ने के निर्देश दिए। नाली का निर्माण ग्राम पंचायत द्वारा कराया जा रहा है। डीपीआरओ ने प्रधान अमर सिंह यादव व सचिव राजेश कुमार को गांव के अन्य स्थानों में ऐसे ही गुणवत्तापूर्ण कार्य कराने को कहा। इसके बाद पंचायत भवन में प्रधान, सचिव व विभागीय टीम के साथ बैठक कर कहा कि कोरोना संक्रमण व अन्य संचारी रोगों से बचाव के लिए स्वच्छता अभियान पर इसे जोड़ दिया जाए। साथ ही सभी लोग टीकाकरण कराएं। प्रधान व सचिव मिलकर गांव वालों को ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण के लिए प्रेरित करें।

बकरी की जकराना प्रजाति के लिए हमीरपुर पुरस्कृत: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली की ओर से कृषि विज्ञान केंद्रों के कार्यों का मूल्यांकन की कार्यशाला कानपुर में आयोजित की गई। इसमें कृषि विज्ञान केंद्र हमीरपुर को पुरस्कृत किया गया है।

कृषि विज्ञान केंद्र हमीरपुर को यह पुरस्कार जलवायु अनुकूल कृषि पर राष्ट्रीय नवप्रवर्तन परियोजना (निक्रा) के तहत किए गए कार्य के लिए दिया गया है। कृषि विश्वविद्यालय बांदा के कुलपति डा. यूएस गौतम ने कृषि विज्ञान केंद्र हमीरपुर के अध्यक्ष व उनकी पूरी वैज्ञानिक टीम को इस कार्य के लिए बधाई दी है।

कृषि विश्वविद्यालय बांदा के सह निदेशक प्रसार डा. नरेंद्र सिंह ने भी सराहना की। कृषि विज्ञान केंद्र हमीरपुर की ओर से निक्रा परियोजना के तहत दो ग्रामों को अंगीकृत किया है। परियोजना का उद्देश्य परिवर्तित हो रहे जलवायु के अनुसार कृषि पद्धति को अपनाने के लिए कृषकों को जागरूक करना। पद्धति अथवा माडल को अंगीकृत करवाना है। यहां के वैज्ञानिकों द्वारा सूखा, अधिक तापमान के हिसाब से मृदा प्रबंधन, सूक्ष्म सिचाई पद्धति, जैविक खेती को बढ़ावा देना। जिससे मृदा में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ाई जा सके। साथ ही विभिन्न फसलों की सूखा रोधी प्रजातियों को लोकप्रिय बनाने के लिए विभिन्न कार्य किए। इस परियोजना के तहत विज्ञानियों की ओर से बकरी की जकराना प्रजाति व वर्ष भर प्राप्त किए जा सकने वाले चारे को भी कृषक प्रक्षेत्र पर विकसित किया। इसके अलावा इन अंगीकृत गांवों में रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण भी दिये गये। यह जानकारी जनसंपर्क अधिकारी डा.बीके गुप्ता ने दी।

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