एक्सप्रेसवे ने बदली बुंदेलखंड की किस्मत, औद्योगिक विकास से पांच गुणा तक बढ़े जमीन के दाम
बुंदेलखंड में औद्योगिक विकास और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के कारण जमीन के दाम पांच गुना तक बढ़ गए हैं। बेहतर कनेक्टिविटी ...और पढ़ें

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे किनारे सर्विस लेन में पड़ी किसानों की जमीनें। जागरण
HighLights
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जमीन के दाम पांच गुना बढ़े
औद्योगिक विकास और कनेक्टिविटी से रियल एस्टेट में बूम
क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े, पलायन में कमी आई
जागरण संवाददाता, बांदा। लंबे संघर्षों का इतिहास लेकर चले बुंदेलखंड में अब चुनौतियां समाप्त की ओर हैं। फतेहपुर के रहने वाले सत्येंद्र सिंह भदौरिया यहां जमीन तलाश रहे हैं। पूछा यहां ऐसा क्या है? तो बोल पड़ते हैं कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनने के बाद से यहां कनेक्टिविटी बढ़ी है। औद्योगिक विकास तेजी से बढ़ रहा है। यहां नए उद्यमों के आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं।
शहर से सटे भूरागढ़ क्षेत्र में गांव के घूर के दिन भी बहुर रहे हैं। यहां की जमीनों में आग लगी हुई है। शहर के शैलेश शुक्ल बताते हैं कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनने के बाद जमीनों में पांच गुणा बढ़ोत्तरी हुई है। हमीरपुर और महोबा की स्थिति भी यही है। प्रयागराज के रियल स्टेट का कारोबार करने वाले कई उद्यमी यहां जमीनें तलाश रहे हैं।
कभी सूखे व अभावग्रस्त क्षेत्र के रूप में जाने जाना वाला बुंदेलखंड अब विकास की नई कहानी गढ़ रहा है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनने से यहां कनेक्टिविटी बढ़ी है तो औद्योगिक विकास ने नए कीर्तिमान बनाए हैं। चित्रकूट से इटावा को जोड़ने वाले बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के माध्यम से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जुड़ा है, जबकि गंगा एक्सप्रेसवे का भी जुड़ाव होने जा रहा है। यहीं पर अटल एक्सप्रेसवे भी जुड़ेगा, जो राजस्थान तक की यात्रा सुगम करेगा। इससे कनेक्टिविटी की बेहतरी बड़े बदलाव लाएगा।
एक्सप्रेसवे के आसपास डिफेंस कारिडोर, सोलर परियोजनाएं व औद्योगिक गलियारा विकसित किया जाना है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से मिले मुआवजे के साथ महंगी हुई जमीन किसानों को मालामाल कर रही है। बीघे में बिकने वाली जमीनें अब फीट में बिकने लगी हैं। कभी एक हजार रुपये बिस्वा बिकी जमीन अब एक लाख रुपये बिस्वा बिक रही है।
कौशांबी के रहने वाले गुड्डू बाजपेयी यहां जमीन तलाश रहे हैं। वह कहते हैं कि दो साल में ही यहां की जमीन कई गुणा महंगी हो गई है। बहुत सारे किसान तो भांप गए हैं कि जमीन महंगी हो जाने वाले भविष्य में संभावनाएं बहुत हैं ऐसे में वह मुंहमांगी कीमत देने में भी तैयार नहीं हो रहे हैं। चित्रकूट में पहाड़ी और राजापुर क्षेत्र में पहले चार लाख का बीघा जमीन आसानी से मिल जाती थी लेकिन अब यहां बीस लाख रुपये का बीघा जमीन मिल रहा है।
अधिवक्ता अंकुर बाजपेयी कहते हैं कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास जिन किसानों ने अपनी जमीनें एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए दी थी अब वही किसान यहां रियल स्टेट का कारोबार कर रहे हैं। सड़कों किनारे होटल ढाबों का व्यवसाय पहले से कई गुणा अधिक हुआ है। युवाओं के लिए यहां रोजगार के अवसर भी सुलभ हो रहे हैं। यमुना और बेतवा पर फोरलेन हाईवे से खेती वाली जमीनों पर मकान बन रहे हैं। जो जमीन पांच सौ रुपये प्रति स्क्वायर फीट थी, वह 1500 से दो हजार तक पहुंच गई।
कनेक्टिविटी बढ़ने से कारखाने, बाजार और होटल तैयार हो रहे हैं। इटावा से शुरू होकर चित्रकूट तक बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे करीब 296 किलोमीटर है। यह जालौन के 64, चित्रकूट के 9, बांदा के 28, महोबा के 8 और हमीरपुर के 29 गांवों से गुजरा है।
चित्रकूटधाम मंडल के मंडलायुक्त अजीत कुमार कहते हैं कि दस सालों में बुंदेलखंड पहले से काफी बदला है। यहां की जमीनें अब महंगी हो गई हैं। कारण सिर्फ यहां की कनेक्टविटी मजबूत होना है। सबसे अहम बात है कि यहां का युवा अब यहां अपना व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। पलायन में भी पहले से काफी कमी आई है।
