यूपी का ऐसा शहर जहां एक नहीं 5 दिनों तक होता है रावण दहन, दशकों पुरानी है परंपरा
बुंदेलखंड के बांदा जिले में दशहरा पर्व की एक अनोखी परंपरा है, जहां देशभर के विपरीत पांच दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर रावण के पुतले जलाए जाते हैं।

तैयार किया गया रावण का पुतला
HighLights
बांदा में 5 दिनों तक होता है रावण दहन।
यह परंपरा दशकों पुरानी है और उत्साह से मनाई जाती है।
भाईचारे और मेल-मिलाप का प्रतीक है यह पर्व।
जागरण संवाददाता, बांदा। बुंदेलखंड के बांदा जिले में दशहरा पर्व की परंपरा पूरे देश से अलग और बेहद अनोखी है। देशभर में जहां एक ही दिन रावण दहन कर विजयदशमी मनाई जाती है, वहीं बांदा शहर में पांच दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर रावण के पुतले का दहन होता है। यह परंपरा दशकों पुरानी है और इसे आज भी बड़े उत्साह के साथ निभाया जा रहा है।
इस परंपरा की शुरुआत शहर के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक प्रागी तालाब के मैदान से होती है। नवरात्र के बाद आज दशमी के दिन दशहरे पर यहां भगवान राम और रावण के युद्ध का भव्य मंचन होगा। हजारों की भीड़ के सामने आतिशबाजी के बीच रावण वध होता है। इसी के साथ शहर के मर्दन नाका, मड़िया नाका और छोटी बाजार समेत एक दर्जन से अधिक मुहल्लों में दशहरा मिलन का दौर शुरू हो जाता है। लोग एक-दूसरे को गले लगाकर विजयदशमी की बधाई देते हैं।
दूसरे दिन यानी मंगलवार को शहर के अलीगंज रामलीला मैदान में दूसरा रावण दहन होगा। इस दिन अलीगंज, गुलाब बाग, शास्त्री नगर और आसपास के क्षेत्रों में दशहरा मिलन समारोह बड़े पैमाने पर होता है। कमेटी द्वारा मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है।
भाईचारे और मेल-मिलाप का प्रतीक है परंपरा
तीसरे दिन छावी तालाब की बारी रामलीला की होती है, जिसका मंचन मानिक कुइयां और छाबी तालाब मैदान में किया जाता है। इस दिन कटरा, बलखंडी नाका, क्योटरा और हाथीखाना मोहल्ले में दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। यहां की रामलीला अपने संवादों और पारंपरिक शैली के लिए काफी प्रसिद्ध है।
चौथा दशहरा सिविल लाइन स्थित जहीर क्लब मैदान के सामने मनाया जाता है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर शहर के गणमान्य लोग शामिल होते हैं।
वहीं पांचवां और अंतिम दशहरा आवास विकास कॉलोनी की काशीराम कॉलोनी, शुकुल कुआं में मनाया जाता है। इसके साथ ही पांच दिवसीय दशहरा महोत्सव का समापन होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा आपसी भाईचारे और मेल-मिलाप का प्रतीक है, जो पूरे शहर को एक साथ जोड़ती है।
