चीनी के साथ गुड़, प्याज और सब्जियों के दामों में भी लगी आग, थाली से गायब होने लगा स्वाद
बांदा में चीनी के बाद अब गुड़, प्याज और हरी सब्जियों के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं, जिससे आम आदमी की थाली का स्वाद बिगड़ गया है।

चीनी के साथ गुड़-प्याज और सब्जियों के दामों में भी लगी आग।

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, बांदा। चीनी के बाद अब गुड़, प्याज और हरी सब्जियों के दामों में आई बेतहाशा तेजी ने आम आदमी की थाली का स्वाद ही बिगाड़ दिया है। जिले की सब्जी मंडी और किराना बाजार में पिछले 15 दिनों में कीमतें दोगुनी तक हो गई हैं।
खुदरा बाजार में 20 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब 45 से 50 रुपये किलो बिक रहा है, वहीं 35 रुपये में मिलने वाला गुड़ 60 रुपये किलो तक पहुंच गया है। टमाटर तो 80 रुपये किलो के पार चला गया है, जिससे रसोई का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।
बीते एक माह से सब्जी से लेकर घरेलू उपयोग की चीजों में हुई वृद्धि से आमजन की जेब पर असर पड़ा है। शहर के थोक में गुड़ 48 से 52 रुपये किलो बिक रहा है, जो एक महीने पहले 30 से 32 रुपये था।
खुदरा में यही गुड़ 60 रुपये तक ग्राहकों को मिल रहा है। इसी तरह नया प्याज मंडी में कम आने से उसके दामों में उछाल है। थोक में प्याज 28 से 32 रुपये और फुटकर में 40 से 45 रुपये किलो बिक रहा है। दुकानदारों का कहना है कि नासिक और इंदौर से प्याज की आवक कम हुई है, वहीं बरसात के कारण स्टोर किया हुआ प्याज खराब हो रहा है।
सब्जियों की बात करें तो सबसे ज्यादा मार टमाटर ने मारी है। 20 से 25 रुपये किलो बिकने वाला टमाटर अब 80 रुपये किलो बिक रहा है। भिंडी 60 रुपये, परवल 50 रुपये, लौकी 40 रुपये पीस, तरोई व करेला 60 रुपये, खीरा 55 से 60 रुपये, शिमला मिर्च 80 रुपये और हरी मिर्च 100 रुपये किलो तक पहुंच गई है। आलू ही एकमात्र ऐसी सब्जी है जो 25 से 30 रुपये किलो पर टिकी है।
गुड व्यापार पर असर
शहर के बलखंडी नाका के गुड़ व्यापारी सुरेश कुमार बताते हैं कि मिलों में गन्ना पेराई देर से शुरू होने और चीनी के निर्यात बढ़ने से गुड़ का उत्पादन घटा है। पहले बांदा मंडी में रोज 200 क्विंटल गुड़ आता था, अब 70 से 80 क्विंटल ही आ रहा है। आगे पितृपक्ष और नवरात्र में गुड़ की मांग और बढ़ेगी, तो दाम 70 रुपये तक जा सकते हैं।
ठेले वालों और चाय वालों की बढ़ी मुश्किल
अतर्रा चुंगी पर प्याज-पकौड़ा बेचने वाले रामबाबू बताते हैं, प्याज 40 रुपये किलो हो गया है। पकौड़ा में प्याज कम कर दिया तो ग्राहक कहता है स्वाद नहीं है। तेल भी महंगा है, समझ नहीं आ रहा दाम बढ़ाएं या घाटा सहें। वहीं चाय दुकानों पर चीनी और गुड़ दोनों महंगे होने से दोहरी मार पड़ी है। कुछ दुकानदारों ने गुड़ वाली चाय का विकल्प शुरू किया था, लेकिन गुड़ भी महंगा होने से वह भी बंद करना पड़ा।
गृहिणियों की रसोई पर असर
शहर के आवास विकास की रहने वाली गृहिणी वर्षा तिवारी कहती हैं, पहले 500 रुपये में टोकरी भर सब्जी आ जाती थी, अब उतने में सिर्फ दो दिन की सब्जी आ रही है। बच्चों को बिना प्याज-टमाटर के सब्जी नहीं भाती। त्योहार नजदीक हैं, मेहमान आएंगे तो क्या बनाएंगे समझ नहीं आ रहा।
इसी तरह बिसंडा की रहने वाली गीता देवी कहती हैं, हम तो गुड़ से ही मीठा काम चलाते थे, अब गुड़ भी चीनी के भाव बिक रहा है। सरकार को गरीबों के बारे में सोचना चाहिए।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ डा. श्याम सिंह के मुताबिक इस बार कम बारिश के बाद अचानक हुई भारी बारिश से सब्जी की फसलों को नुकसान पहुंचा है। खेतों में पानी भरने से भिंडी, टमाटर और परवल की पैदावार आधी रह गई है।
वहीं प्याज का स्टोरेज खराब होने से बाजार में आवक घटी है। दूसरा कारण त्योहारी डिमांड है। रक्षाबंधन से लेकर दिवाली तक मिठाई, गुड़ और सब्जियों की मांग 40 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, जिसका फायदा जमाखोर उठाते हैं।
प्रशासन की नजर
इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी क्यामुद्दीन अंसारी का कहना है कि चीनी के साथ-साथ गुड़, प्याज और आलू की कीमतों पर भी निगरानी रखी जा रही है। मंडी में रोज के भाव लिए जा रहे हैं।
यदि कोई व्यापारी तय मुनाफे से ज्यादा वसूलता या जमाखोरी करता मिला तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत छापेमारी और कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि घबराकर सामान का स्टॉक न करें, जल्द ही नई फसल आने से दामों में कमी आएगी।
