बांदा में दो साल बाद भी राशन कार्ड धारकों की नहीं हुई ई-केवाईसी, अब कोटेदारों को सौंपी गई जिम्मेदारी
बांदा के अतर्रा में दो साल बाद भी छह प्रतिशत राशनकार्ड धारकों की ई-केवाईसी पूरी नहीं हो पाई है। अब ...और पढ़ें

दो वर्ष बाद भी छह फीसद राशनकार्ड सदस्यों की नहीं हुई ई-केवाईसी।
HighLights
6% राशनकार्ड सदस्यों की ई-केवाईसी दो साल बाद भी अधूरी।
पूर्ति विभाग ने कोटेदारों को शत प्रतिशत ई-केवाईसी कराने के निर्देश दिए।
नए उपभोक्ता और बच्चों के आधार न बनने से प्रक्रिया में देरी।
संवाद सहयोगी, अतर्रा (बांदा)। राशनकार्ड उपभोक्ताओं की सही पहचान और राशन वितरण में पारदर्शिता के लिए शुरू की गई ई-केवाईसी प्रक्रिया दो वर्ष बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। शासन ने एक जून 2024 से तीन माह के लिए ई-केवाईसी शुरू कराई थी। शत प्रतिशत कार्य पूरा न होने पर समयावधि कई बार तीन-तीन माह बढ़ाई गई। इसके बावजूद तहसील क्षेत्र में अभी करीब छह फीसद राशनकार्ड सदस्यों की ई-केवाईसी नहीं हो पाई है।
अब पूर्ति विभाग ने कोटेदारों को अभियान चलाकर शत प्रतिशत ई-केवाईसी कराने के निर्देश दिए हैं। तहसील क्षेत्र के 108 गांव और कस्बे में 133 कोटेदार उचितदर की दुकानें संचालित कर रहे हैं।
इन दुकानों से जुड़े करीब 1.14 लाख राशनकार्डों में लगभग 4.16 लाख सदस्य पंजीकृत हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक करीब 94 प्रतिशत सदस्यों की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। शेष छह प्रतिशत सदस्य अभी प्रक्रिया से बाहर हैं।
पूर्ति निरीक्षक अजीत सिंह यादव ने बताया कि ई-केवाईसी के लिए उपभोक्ताओं को लगातार जागरूक किया जा रहा है। कोटेदारों को घर-घर पहुंचकर छूटे हुए सदस्यों की ई-केवाईसी कराने के निर्देश दिए गए हैं। शत प्रतिशत कार्य पूरा कराने के लिए कोटेदारों को सुबह से दोपहर एक बजे तक राशन वितरण और इसके बाद ई-केवाईसी करने को कहा गया है।
उन्होंने बताया कि नए उपभोक्ताओं के राशनकार्ड में जुड़ने और बच्चों के आधार कार्ड नहीं बनने के कारण भी ई-केवाईसी में समय लग रहा है। एसडीएम शैलेंद्र मिश्रा ने पूर्ति विभाग को प्रक्रिया में तेजी लाकर जल्द शत प्रतिशत ई-केवाईसी पूरी कराने के निर्देश दिए हैं।
