बांदा में रेल दोहरीकरण के लिए जमीन खाली कराने को रेलवे का अल्टीमेटम, मकान हटाने के लिए 15 दिन की मोहलत
झांसी-मानिकपुर रेल दोहरीकरण परियोजना के लिए बांदा में जमीन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
झांसी-मानिकपुर रेल दोहरीकरण परियोजना के तहत जमीन खाली होगी।
बांदा में पांच भू-स्वामियों को निर्माण हटाने का नोटिस।
रेलवे ने ₹54.28 लाख का मुआवजा पहले ही दिया।
जागरण संवाददाता, बांदा। झांसी-मानिकपुर रेल दोहरीकरण परियोजना के तहत बांदा रेलवे स्टेशन से महोबा की ओर क्योटरा रेलवे क्रासिंग के पास नई रेल पटरी बिछाने के लिए जमीन खाली कराई जाएगी। इसके लिए रेलवे के निर्माण विभाग ने भवानीपुरवा गांव के पांच भू-स्वामियों को नोटिस जारी किए हैं।
अधिग्रहीत जमीन पर बने मकानों को हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। नोटिस के अनुसार, निर्माण हटाने की तिथि पांच नवंबर है। इसके बाद रेलवे की ओर से 10 दिन का अतिरिक्त समय देते हुए दोबारा नोटिस जारी किया जाएगा। इस अवधि में भी निर्माण नहीं हटाए गए तो रेलवे बुलडोजर चलाकर मकानों को हटाने की कार्रवाई करेगा।
रेलवे की ओर से संबंधित भू-स्वामियों को जमीन और मकानों के लिए कुल 54 लाख 28 हजार रुपये का मुआवजा भी दिया जा चुका है। इसमें जमीन के लिए निर्धारित दर का दोगुना और मकानों के लिए एक गुना मुआवजा शामिल है।
हो चुका है मुआवजे का भुगतान
उप मुख्य अभियंता निर्माण, प्रयागराज अभिषेक सिंह ने बताया कि सभी संबंधित लोगों को मुआवजे का भुगतान कर दिया गया है। क्योटरा रेलवे क्रासिंग के पास कुल 281.5 वर्ग मीटर जमीन अधिग्रहीत की गई है। इसमें सुंदर सिंह पुत्र जितेंद्र वीर की गाटा संख्या 4905 में 71.5 वर्ग मीटर, शहनउल्लाह की गाटा संख्या 4905 में 84 वर्ग मीटर, चिंतामणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी शिवदेवी की संयुक्त 78 वर्ग मीटर तथा सुरेश कुमार गुप्ता की 48 वर्ग मीटर जमीन शामिल है।
इस तरह कुल पांच भू-स्वामियों की जमीन अधिग्रहीत की गई है। रेल दोहरीकरण परियोजना के तहत नई पटरी बिछाने के लिए अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता के चलते रेलवे ने अधिग्रहीत भूमि पर बने निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
