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नाबालिगों के यौन शोषण मामले में बांदा पाक्सो कोर्ट में गवाहों से लंबी जिरह, अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को

Published: Wed, 23 Sep 2026 01:35 AM (IST)

बांदा में 33 नाबालिगों के यौन शोषण से जुड़े आईटी एक्ट मामले में पाक्सो कोर्ट में गवाहों से साढ़े चार ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. नाबालिग यौन शोषण मामले में बांदा पाक्सो कोर्ट में हुई सुनवाई।

  2. सीबीआई के गवाहों से साढ़े चार घंटे तक चली गहन जिरह।

  3. निलंबित जेई रामभवन, मो. आकिफ मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर।

जागरण संवाददाता, बांदा। 33 नाबालिगों के यौन शोषण के मामले में बीते 20 फरवरी को फांसी की सजा पा चुके चित्रकूट के सिंचाई विभाग के निलंबित जेई रामभवन व सह आरोपित दिल्ली के इंजीनियर मो. आकिफ की आईटी एक्ट के मुकदमे की गुरुवार को विशेष न्यायालय पाक्सो एक्ट में पेशी की तिथि निर्धारित रही। जिसमें सीबीआई के लोक अभियोजक धारा सिंह मीना ने गवाह सहायक अनुसंधान अधिकारी महिला आयोग सौरभ अग्रवाल व दिल्ली के टेलीकाम वोडा फोन कंपनी के नोडल अफसर सौरभ सिंह को न्यायालय में पेश किया। पिछली पेशी में दोनों गवाहों की तीन घंटे तक दर्ज हुए बयानों को लेकर दोनों आरोपितों के अधिवक्ताओं ने अलग-अलग साढ़े चार घंटे जिरह की।

आकिफ पर आरोप है कि यौन शोषण मामले में उसने इसी कंपनी का मोबाइल इस्तेमाल किया था। दिल्ली के इंजीनियर आरोपित मो. आकिफ के पेश न होने पर हाजिरी माफी लगाई गई। जबकि जेई रामभवन को जेल की बैरक नंबर 14 ए से कड़ी निगरानी में लाकर न्यायालय में पेश कराया गया। न्यायालय ने अगली तारीख एक अक्टूबर निर्धारित की है।

जेई रामभवन व सह आरोपित दिल्ली के इंजीनियर मो. आकिफ की गुरुवार को विशेष न्यायालय पाक्सो एक्ट न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत में पेशी की तारीख निर्धारित थी। इसके पूर्व 13 मार्च की पिछली सुनवाई में केस की पैरवी कर रहे सीबीआई के लोक अभियोजक धारा सिंह मीना ने मुख्य स्वतंत्र गवाह को न्यायालय में पेश किया था। इसी तरह सात अप्रैल को भी मुख्य गवाह के सीबीआई के लोक अभियोजक ने शेष रह गए बयान दर्ज कराए थे।15 अप्रैल व 18 अप्रैल को हुई पेशी में जिरह आदि नहीं हुई थी। जेई की ओर से बचाव पक्ष के अधिवक्ता भूरा निषाद ने प्रार्थना पत्र देकर जिरह करने से मना किया था।

बाद में 14 मई को बचाव पक्ष के अधिवक्ता की अपील को न्यायालय ने खारिज करते हुए मुकदमा चलने का आर्डर दिया था। इसके बाद से लगातार तारीखें चल रही हैं। छह अगस्त को मुख्य गवाह से निलंबित जेई रामभवन के अधिवक्ता भूरा प्रसाद निषाद ने मुकदमा दर्ज करते समय दर्शाए गए घटनाक्रम को लेकर आधे घंटे तक जिरह की थी। इसमें बचाव पक्ष की अधिवक्ता की ओर से कई सवाल किए गए थे। जिसका मुख्य गवाह ने जवाब दिया था।

इसी तरह एक सितंबर को पेशी में सीबीआई के लोक अभियोजक की ओर से दूसरे गवाह एम्स के डाक्टर को पेश कर गवाही कराई थी। दस सितंबर की पेशी में सीबीआई के लोक अभियोजक ने दो नए गवाहों गवाह सहायक अनुसंधान अधिकारी महिला आयोग सौरभ अग्रवाल व दिल्ली के टेलीकाम वोडा फोन कंपनी के नोडल अफसर सौरभ सिंह को न्यायालय में पेश किया था। लेकिन अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य न करने से सिर्फ उनके बयान दर्ज हुए थे। जिरह टल गई थी।

इसी के चलते अब मंगलवार को निलंबित जेई रामभवन के अधिवक्ता ने गवाहों से करीब आधे घंटे तक जिरह की। जबकि मो. आकिफ के अधिवक्ता मो. अनस उल्ला ने चार घंटे तक जिरह की। गवाह की कंपनी का मोबाइल यौन शोषण मामले में इस्तेमाल करने के उनके दिए बयानों को लेकर बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने जिरह की। इसी तरह निलंबित जेई के अधिवक्ता भूरा प्रसाद निषाद ने भी घटनाक्रम को लेकर गवाहों से सवाल किए हैं।

मुकदमे में कुल 12 गवाहों के नाम शामिल किए गए हैं। इसमें अब तक चार गवाहों के बयान दर्ज कराने के साथ उनसे जिरह की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इससे सीबीआई की ओर से अब एक अक्टूबर की अगली पेशी में नए गवाह पेश किए जा सकते हैं। बताते चले कि नाबालिगों के साथ यौन शोषण मामले में सीबीआई की जांच में सजायाफ्ता निलंबित जेई रामभवन व सह आरोपित दिल्ली के इंजीनियर मो. आकिफ के विरुद्ध आईटी एक्ट व संगठित होकर साजिश करने की बात सामने आयी आई थी।

जिसमें दोनों के विरुद्ध 31 अक्टूबर 2020 को दिल्ली में मुकदमा दर्ज कराया था। 2021 में न्यायालय में विचाराधीन इस मामले का आरोप तय किए थे। न्यायालय के विचाराधीन मामले में सीबीआई ने 12 गवाहों को मुकदमे में शामिल किया है। शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह ने बताया कि आईटी एक्ट के मामले में भी तारीखें चल रही हैं।

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