छतों पर पहरा, गलियों में दहशत, बांदा में बंदरों के हमलों से सहमे लोग
बांदा जिले में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों भयभीत हैं। बंदरों के हमलों ...और पढ़ें
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HighLights
बांदा में बंदरों के हमलों से लोग भयभीत, बच्चे असुरक्षित।
कई घटनाओं में लोग घायल, एक मासूम की मौत भी हुई।
वन विभाग पर कार्रवाई न करने का आरोप, ग्रामीण परेशान।
जागरण संवाददाता, बांदा। जिले में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। गांव से लेकर शहर तक बंदर घरों की छतों पर धमाचौकड़ी मचा रहे हैं और मौका मिलते ही लोगों पर हमलावर हो रहे हैं। इन बंदरों के हमलावर होने से अब ग्रामीण भयभीत रहते हैं। अपने बच्चों को अकेला नहीं छोड़ते हैं। बाहर मैदान में खेलने या फिर स्कूल जाने के लिए बच्चों के साथ कोई न कोई अभिभावक उनके साथ जाते लाठी डंडा लेकर जाते हैं।
जिले में बीते कुछ वर्षाें से बंदरों का आतंक बढ़ा हुआ है। कई ऐसी घटनाएं हुईं जिससे लोग बंदरों के हमलावर होने से सशंकित रहते हैं। एक साल की पांच बड़ी घटनाओं पर नजर डालें तो स्थिति की गंभीरता समझ आती है। 28 दिसंबर 2025 को बड़ोखर बुजुर्ग में कटखने बंदर ने धर्मेंद्र, चंदन, कुलदीप और आठ वर्षीय मोहित को काटकर घायल कर दिया था। 11 जनवरी 2026 को गिरवां में दीपक, सुशील, दीपेंद्र और मनीष पर बंदरों ने हमला कर दिया।
मार्च में दोहतरा-भवानीपुर में बंदर घर में घुस आया और तीन वर्षीय रानी व विनीता को काट लिया, इसी दौरान बचने की कोशिश में राजकुमारी छत से गिरकर घायल हो गई। सबसे दर्दनाक घटना जनवरी में छापर में हुई, जहां विश्वेश्वर वर्मा के दो माह के मासूम को बंदर छत पर उठा ले गया और नीचे फेंक दिया, जिससे बच्चे की मौत हो गई।
मई-जून 2026 में जसईपुर में बंदरों के हमले में छह लोग घायल हुए थे। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बावजूद वन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है, लिहाजा दिन प्रतिदिन घटनाएं बढ़ रहीं हैं।
बंदरों ने जीना मुश्किल कर दिया है। छत पर जाते ही हमला कर देते हैं। बच्चों को स्कूल या फिर कहीं जाने के लिए अकेले नहीं भेजते हैं। प्रशासन सुन नहीं रहा है। रामकिशोर, जसईपुर
-बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गांव में कोई भी सुरक्षित नहीं है। वन विभाग भी बंदरों को पकड़वाने से हाथ खड़े कर दिया है। लवकुश, छापर
बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों व नगर पालिका और नगर पंचायतों को मिली है। इस संबंध में कोई नए दिशा-निर्देश आएगें तो उसी के अनुसार व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल यदि बंदरों को पकडवाना है मथुरा या आगरा से टीम को बुलाना पड़ेगा, जिसका खर्च ग्रामीणों को वहन करना होगा। अरविंद कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी, बांदा
