55 हजार का लोन बढ़कर हुआ 2.10 लाख, बांदा के किसान को 13 साल पुराने कर्ज से लोक अदालत ने 10 मिनट में दिलाई मुक्ति
बांदा में राष्ट्रीय लोक अदालत ने 1.23 लाख से अधिक मामलों का निपटारा कर कर्जदारों को बड़ी राहत दी। बेटी ...और पढ़ें

किसान चुनबाद
HighLights
1.23 लाख से अधिक मामलों का सुलह-समझौते से निपटारा।
बेटी की शादी और इलाज के कर्ज से मिली मुक्ति।
बैंकों के 936 मामलों में 9.95 करोड़ रुपये वसूल।
जागरण संवाददाता, बांदा। बेटी की शादी के लिए लिया कर्ज कब इतना बढ़ गया, पता ही नहीं चला। 13 साल से इसे चुकाने की चिंता थी। आज 10 मिनट में मामला खत्म हुआ तो लगा जैसे सिर से बड़ा बोझ उतर गया। कालिंजर के शौता निवासी किसान चुनबाद की यह बात राष्ट्रीय लोक अदालत में उन परिवारों की कहानी बयां कर रही थी, जो वर्षों से कर्ज चुकाने की कोशिश और बढ़ती रकम के बीच फंसे थे।
वर्ष 2012 में छोटी बेटी की शादी के लिए 55 हजार रुपये का कर्ज लेने वाले चुनबाद की देनदारी बढ़कर 2.10 लाख रुपये हो गई थी। शनिवार को समझौते के बाद उन्हें 73 हजार रुपये में कर्ज से राहत मिल गई। चुनबाद ने कालिंजर स्थित इंडियन बैंक की शाखा से कर्ज लिया था।
आर्थिक परेशानी के कारण समय पर भुगतान नहीं कर सके। ब्याज बढ़ता गया और रकम कई गुना हो गई। लोक अदालत में इंडियन बैंक के मुख्य महाप्रबंधक मुकेश कुमार की मौजूदगी में मामला 73 हजार रुपये में निपटा। चुनबाद ने कहा कि वर्षों बाद कर्ज खत्म होने से अब बेटी की शादी के समय लिया गया बोझ भी हल्का महसूस हो रहा है।
मिथलेश के दो भाई हैं दृष्टिबाधित
गुमई निवासी मिथलेश के परिवार की परेशानी भी इलाज के लिए लिए गए कर्ज से जुड़ी थी। उनके दिवंगत पिता रामरतन ने बहेरी स्थित उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखा से कैंसर के इलाज के लिए 30 हजार रुपये का कर्ज लिया था। समय पर भुगतान नहीं होने से रकम बढ़कर 61,300 रुपये हो गई।
लोक अदालत में मामला 7,500 रुपये में निपट गया। मिथलेश ने बताया कि चार भाइयों में दो दृष्टिबाधित हैं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद भाइयों ने किसी तरह रकम जुटाकर जमा की। कर्ज कम रकम में खत्म होने से परिवार को बड़ी राहत मिली।
कनवारा निवासी गुरु प्रसाद भी पांच साल से कर्ज की चिंता झेल रहे थे। वर्ष 2020 में सिविल लाइंस स्थित इंडियन बैंक से खेती के लिए ट्रैक्टर लेने को किसान क्रेडिट कार्ड पर 7.31 लाख रुपये का कर्ज लिया था। रकम जमा नहीं कर पाने के कारण मामला लंबित था।
लोक अदालत में पांच मिनट में निपटा मामला
लोक अदालत में 3.50 लाख रुपये में समझौता हुआ। भवानीपुरवा निवासी जयभान सिंह ने वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज लिया था। चार लाख 70 हजार रुपये तक पहुंची देनदारी को लेकर वह 10 साल से परेशान थे। लोक अदालत में पांच मिनट में मामला दो लाख एक हजार रुपये में निपट गया। उन्होंने राहत की सांस ली।
जनपद मुख्यालय के साथ अतर्रा, बबेरू, नरैनी के न्यायालय और तहसील मुख्यालयों में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1,23,708 वाद सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित हुए। इनमें 17 करोड़ 56 लाख 61 हजार 618 रुपये अर्थदंड वसूल किया गया।
जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष अल्पना ने दीप प्रज्वलित कर लोक अदालत का शुभारंभ किया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 71 मामलों में बीमा कंपनियों से पीड़ित पक्षों को तीन करोड़ 92 लाख 42 हजार रुपये दिलाए गए।
विद्युत के 9,882 प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण कर सात करोड़ 25 लाख 94 हजार 378 रुपये वसूले गए। राजस्व विभाग के न्यायालयों में 81,570 वाद, आरटीओ के 16,802 और पुलिस विभाग के 12,640 मामले निस्तारित हुए।
बैंकों के 936 मामलों में समझौते से निस्तारण कर कर्जदारों से नौ करोड़ 95 लाख रुपये वसूल किए गए। उपभोक्ता फोरम व अन्य विभागों के 216 तथा बीएसएनएल के 11 मामले भी निस्तारित हुए। न्यायालय परिसर में विभिन्न विभागों ने अपनी योजनाओं से संबंधित स्टाल लगाए।
