बांदा में जीपीएफ घोटाले में रिकवरी शुरू, दो कर्मचारियों ने जमा किए एक-एक लाख
स्वास्थ्य विभाग के जीपीएफ खातों में करीब 1.78 करोड़ रुपये की अनियमितता के बाद रिकवरी शुरू हो गई है। महोबा के दो कर्मचारियों ने एक-एक लाख रुपये जमा किए हैं।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
स्वास्थ्य विभाग के जीपीएफ खातों में 1.78 करोड़ की अनियमितता।
महोबा के दो कर्मचारियों ने एक-एक लाख रुपये जमा किए।
बांदा के कर्मचारी ने रकम जमा करने में देरी की, निर्देश जारी।
जागरण संवाददाता, बांदा। स्वास्थ्य विभाग के जीपीएफ खातों में करीब 1.78 करोड़ रुपये की अनियमितता का मामला सामने आने के बाद अब रिकवरी शुरू हो गई है। महोबा जिला महिला अस्पताल के वरिष्ठ सहायक संतोष कुमार वर्मा और चालक अंबिका शर्मा ने एक-एक लाख रुपये जमा किए हैं।
वहीं बांदा के तिंदवारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात आप्टोमेट्रिस्ट देवेंद्र कुमार ने एक सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन अभी तक रकम जमा नहीं की है। इस पर मंडल स्तर से गुरुवार को बांदा के सीएमओ को पत्र भेजकर जल्द धनराशि जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला सितंबर के पहले सप्ताह में प्रयागराज से आई ऑडिट टीम की जांच में सामने आया था। टीम ने बांदा और महोबा के स्वास्थ्य विभाग के जीपीएफ खातों और अभिलेखों का मिलान किया तो निर्धारित राशि से अधिक भुगतान समेत कई अनियमितताएं मिली थीं।
शुरुआती जांच में बांदा में करीब 93 लाख और महोबा में करीब 85 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आई। इस तरह दोनों जिलों में कुल अनियमितता करीब 1.78 करोड़ रुपये बताई गई। बांदा में तिंदवारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के आप्टोमेट्रिस्ट देवेंद्र कुमार के जीपीएफ खाते में भी निर्धारित राशि से अधिक भुगतान मिला।
शुरुआती जांच में उनके खाते में करीब 35 लाख रुपये की अनियमितता सामने आई थी। बाद में अभिलेखों और खाते के मिलान में यह राशि बढ़कर 70 लाख रुपये से अधिक बताई गई थी। बांदा में अन्य खातों को मिलाकर करीब 93 लाख रुपये की अनियमितता सामने आने के बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू हुई।
इसके बाद दोबारा प्रयागराज की तीन सदस्यीय ऑडिट टीम ने बांदा पहुंचकर पासबुक, सेवा पुस्तिका, जीपीएफ ऋण और भुगतान से जुड़े अभिलेखों की जांच की। जिला स्तर पर भी सीएमओ डॉ. विजेंद्र सिंह की निगरानी में भी जांच कराई गई।
जिलाधिकारी अमित आसेरी के निर्देश पर मुख्य कोषाधिकारी विनोद कुमार ने भी सीएमओ कार्यालय पहुंचकर अभिलेखों और जीपीएफ से संबंधित रिकार्ड की पड़ताल की। मंडलायुक्त अजीत कुमार ने स्वास्थ्य निदेशक कार्यालय के कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की भी बात कही थी।
इसी जांच में महोबा जिला महिला अस्पताल के वरिष्ठ सहायक संतोष कुमार वर्मा के जीपीएफ खाते में करीब 85 लाख रुपये की अनियमितता सामने आई थी। वहीं चालक अंबिका शर्मा के खाते से भी करीब नौ लाख रुपये निकाले जाने की बात सामने आई।
प्रयागराज से आई टीम ने संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए और जीपीएफ से जुड़े अभिलेख अपने कब्जे में लेकर जांच आगे बढ़ाई। अब जांच के साथ रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
चित्रकूटधाम मंडल के अपर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अभय सिंह ने बताया कि महोबा के वरिष्ठ सहायक संतोष कुमार वर्मा और चालक अंबिका शर्मा ने एक-एक लाख रुपये जमा किए हैं। दोनों से शेष धनराशि की वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
वहीं बांदा के आप्टोमेट्रिस्ट देवेंद्र कुमार ने धनराशि जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन समय बीतने के बाद भी रकम जमा नहीं की गई। इस पर अपर स्वास्थ्य निदेशक ने बांदा के सीएमओ डॉ. विजेंद्र सिंह को पत्र भेजकर कर्मचारी को जल्द से जल्द धनराशि जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही निर्देशों का पालन नहीं होने पर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। अब विभागीय जांच के साथ यह भी देखा जा रहा है कि कुल कितनी धनराशि की वास्तविक अनियमितता हुई और उसकी पूरी रिकवरी कब तक हो पाती है।
