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बांदा में पति की मौत के बाद भी नहीं रुकी न्याय की लड़ाई, 20 साल बाद बैंक को लौटाने पड़े 15.94 लाख

Published: Wed, 14 Oct 2026 03:14 PM (IST)

बांदा में दो दशक बाद एक परिवार को बैंक धोखाधड़ी मामले में न्याय मिला है। उपभोक्ता आयोग के आदेश पर ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. दो दशक बाद बैंक धोखाधड़ी मामले में न्याय मिला।

  2. उपभोक्ता आयोग ने बैंक को 15.94 लाख चुकाने का आदेश दिया।

  3. मूलधन 6.57 लाख पर ब्याज और हर्जाना भी शामिल।

जागरण संवाददाता, बांदा। खाते से लाखों रुपये गायब होने के मामले में करीब दो दशक बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के आदेश पर त्रिवेणी स्थित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ने मूल धनराशि 6.57 लाख पर ब्याज और हर्जाने सहित कुल 15.94 लाख रुपये का आखिर भुगतान करना पड़ गया। सोमवार को आयोग के रीडर अजय कुमार मिश्रा ने दिवंगत रामप्रकाश द्विवेदी की पत्नी कृष्णा द्विवेदी को चेक सौंपा।

शहर के बलखंडी नाका निवासी रामप्रकाश द्विवेदी ने बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक पर खाते में जमा होने वाली रकम और आयकर विभाग से मिले चेक की धनराशि खाते में न होने का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986 के तहत आयोग में परिवाद दायर किया था। मुकदमा लड़ते-लड़ते ही रामप्रकाश की मौत हो गई।

इसके बाद उनकी पत्नी कृष्णा ने मुकदमे की पैरवी जारी रखी। आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र और सदस्य गीतांजलि भारती की पीठ ने 31 जुलाई 2026 को बैंक को 6,57,370 रुपये की मूल धनराशि पर छह सितंबर 2006 से भुगतान की तारीख तक सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का आदेश दिया।

इसके अलावा मानसिक क्षति के लिए 10 हजार और वाद व्यय के लिए पांच हजार रुपये देने व निर्धारित 45 दिनों में भुगतान नहीं करने पर ब्याज दर नौ प्रतिशत किए जाने का स्पष्ट रूप से जिक्र करते हुए आदेश दिया। आयोग के आदेश के अनुसार बैंक ने उनके खाते में धनराशि जमा कर दी।

इसके बाद कृष्णा को 15,94,332 रुपये का चेक सौंपा गया। करीब दो दशक तक चले इस मामले में ब्याज और हर्जाने के कारण भुगतान की कुल रकम मूल धनराशि से दोगुने से भी अधिक हो गई।

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