बलरामपुर : भले ही केंद्र सरकार आमजन को सस्ते दर पर जीवनरक्षक दवाएं मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की योजना चला रही हो, लेकिन जिला स्तरीय अस्पतालों में बाहर से दवाएं लिखने की परंपरा खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। जिला मेमोरियल, संयुक्त व जिला महिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को धरती के भगवान बेहिचक बाहर की दवाएं लाने का पर्चा थमा देते हैं। जिससे मरीजों व तीमारदारों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है।

²श्य एक : समय 12.05 बजे। जिला मेमोरियल अस्पताल। ओपीडी का पर्चा बनवाने के लिए मरीजों की कतार लगी थी। दवा वितरण काउंटर पर भी भारी भीड़ जुटी रही। इमरजेंसी में अपनी ढाई साल की बेटी का इलाज कराने आए गैंसड़ी क्षेत्र के विशुनपुर कला निवासी अब्दुल्ला ने बताया कि बेटी फातिमा को उल्टी-दस्त की शिकायत है। डॉक्टर ने ग्लूकोज की बोतल बाहर से लाने को कहा है।

²श्य दो : समय 12.25 बजे। जिला महिला अस्पताल। चिकित्सकों के कक्ष के सामने महिलाओं व बच्चों को दिखाने के लिए भारी भीड़ लगी थी। दवा वितरण काउंटर पर कुछ महिलाएं दवा ले रही थीं। सदर ब्लॉक के टेंगनहिया मानकोट निवासिनी शीला ने बताया कि अपने दो माह के नाती को दिखाने आई थी। जिस पर डॉक्टर ने कुछ दवाएं अस्पताल से और कुछ बाहर से लाने का पर्चा दिया है।

ये मामले तो महज बानगी भर हैं। जिला मेमोरियल, संयुक्त व महिला अस्पताल में मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रहीं हैं। सूत्रों की मानें तो दवा प्रतिनिधियों से मोटे कमीशन व उपहार के प्रलोभन में बाहरी दवाएं लिखने की परंपरा जारी है।

सीएमएस के बोल :

-जिला मेमोरियल अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसएचआइ जैदी का कहना है कि सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं। दवाओं की कमी होने पर बराबर इंडेंट भेजा जाता है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने कहाकि सरकार के मानक के अनुसार 87 दवाएं अस्पतालों में उपलब्ध होनी चाहिए। इनमें से यहां जिन 81 दवाओं की आवश्यकता है, वह उपलब्ध हैं। बाहर से दवा लिखने की बात गलत है। मरीजों के दबाव पर ही डॉक्टर बाहर की दवा लिखते होंगे।

Posted By: Jagran