हरिहरगंज (बलरामपुर) :

जिला मुख्यालय से सटे हरिहरगंज बाजार में श्रीश्री 108 बाल बजरंगदल रामलीला समिति के तत्वावधान में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। चित्रकूट में राम-भरत मिलाप का भावपूर्ण मंचन देख दर्शक भाव विभोर हो उठे। शूर्पणखा का नाक-काट कटना, खर-दूषण वध व सीताहरण का मंचन देख देर रात तक लोग रामलीला का लुफ्त लेते रहे।

वनवास के दौरान श्रीराम सीता व लक्ष्मण के साथ चित्रकूट में कुटिया बनाकर रहते हैं। इसी बीच भरत व शत्रुघ्न चित्रकूट पहुंचते हैं। श्रीराम भरत को सीने से लगा लेते हैं। भरत पिता दशरथ की मृत्यु की सूचना देते हैं, तो श्रीराम पर अत्यंत दु:खी होकर विलाप करने लगते हैं। भरत श्रीराम से वापस अयोध्या चलकर राजगद्दी संभालने की याचना करते हैं। इस पर श्रीराम पिता दशरथ की आज्ञा से 14 वर्ष वनवास के बाद ही अयोध्या वापस लौटने की बात कहते हैं। इस पर भरत राजगद्दी पर शासन के लिए प्रतीक स्वरूप श्रीराम की खड़ाऊं मांगते हैं। उसे सिर पर रखकर अयोध्या लौटते हैं। पंडाल में गीत बज उठता है 'रामभक्त ले चला है राम की निशानी, शीश पर खड़ाऊं अंखियों में पानी।' यह ²श्य देखकर दर्शक भाव से भर जाते हैं। राम की भूमिका में अनिल मिश्र, लक्ष्मण का पात्र वैभव मिश्र, भरत के रूप में अमन मिश्र व शत्रुघ्न के किरदार में अंकित मिश्र के अभिनय पर दर्शक खूब तालियां बजाते हैं। रामलीला मंचन के दौरान बीच-बीच में समिति के श्रीनारायण मिश्र रामचरितमानस की पंक्तियां प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। आयोजन में समिति के अध्यक्ष राकेश शुक्ल, अवनीश उपाध्याय, धर्मेंद्र मिश्र, अरुण शुक्ल, विकास उपाध्याय, अरविद तिवारी, बलभद्र प्रसाद शुक्ल, अतवारी लाल, मंगल गुप्त, नीरज मिश्र का विशेष योगदान रहा।

Edited By: Jagran