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बलरामपुर, [रमन मिश्र]। दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालु हो या कि विदेशी पर्यटक, देवीपाटन मंदिर में दर्शन के साथ वे एक बदलाव देखकर चौंक जाते हैं। पूरे मंदिर परिसर में उन्हें पॉलीथिन नजर नहीं आती। पालीथिन प्रतिबंध को लेकर कई जगहों पर जोर-शोर से कवायद हुई, लेकिन वह इतनी कारगर कहीं नहीं हुई जितना कि इस मंदिर में। 51 शक्तिपीठों में शुमार देवीपाटन शक्तिपीठ में श्रद्धालु आशीर्वाद के साथ पर्यावरण संरक्षण की अनमोल सीख भी लेकर जा रहे हैं। आदिशक्ति मां देवी पाटेश्वरी का यह मंदिर धर्म के साथ-साथ नियमों के अनुपालन में भी आस्था जगा रहा है। यहां से जाने वाले श्रद्धालु यही सोचते हुए वापस जाते हैं कि जब यहां पर पॉलीथिन पर प्रतिबंध लागू हो सकता है तो बाकी जगहों पर क्यों नहीं।

पीठाधीश्वर महंत मिथलेशनाथ योगी ने मंदिर परिसर में पॉलीथिन के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। परिसर में सजी प्रसाद की दुकानों पर पूजन सामग्री पॉलीथिन के बजाय कपड़े के थैले में दी जाती है। मंदिर प्रशासन की यह पहल पर्यावरण को प्रदूषण से दूर रखने में महती भूमिका निभा रही है जो किसी नजीर से कम नहीं है।

एक साल से प्रतिबंधित है पॉलीथिन 

पॉलीथिन के दुष्प्रभाव से जनजीवन को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इसके उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर के संरक्षक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ाई से अनुपालन कराने की पहल की। एक वर्ष पूर्व मंदिर परिसर में पॉलीथिन के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया। परिसर में पूजन सामग्री, सौंदर्य प्रसाधन, फल-फूल समेत अन्य दुकान लगाने वालों को पॉलीथिन रखने की मनाही कर दी गई। नतीजा, दुकानदार कपड़े का थैला रखने लगे। यहां आने वाले श्रद्धालुओं से थैले की मामूली कीमत लेकर उसमें सामान दिया जाने लगा। तबसे यह परंपरा जारी है।

 

Posted By: Anurag Gupta

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