डिप्टी सीएम से निराश, अब नए डीएम से बंधी है आस

संवादस बलरामपुर : यूं तो दावा है कि आमजन की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले दोषियों को सजा जरूर मिलेगी, लेकिन मैनेजमेंट के खेल ने इसे पलट कर रख दिया है। हालत यह है कि दो माह पहले डिप्टी सीएम के निर्देश पर सीएमओ ने जांच कर चिकित्सक व स्टाफ नर्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी थी, लेकिन कार्रवाई तो नहीं हुई बल्कि रसूखदार के स्टाफ नर्स को पदोन्नति मिल गई। संवेदनहीनता का शिकार हुई नीलम को भले ही डिप्टी सीएम इंसाफ नहीं दिला पाए, लेकिन नए जिलाधिकारी से न्याय की उम्मीद जगी है। छह माह पहले खलवा की नीलम को 10 हजार रुपये न देने के कारण जिला संयुक्त चिकित्सालय से सर्जन डा. अरुण कुमार व स्टाफ नर्स सावित्री जायसवाल ने भगा दिया था। इस संवेदनहीनता के कारण उसके गर्भस्थ शिशु की मौत भी हो गई थी। भटक रही नीलम की व्यथा छह माह बाद उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक तक पहुंची। उनके निर्देश पर सीएमओ की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी ने सर्जन व स्टाफ नर्स को वसूली व गर्भवती भगाने का दोषी पाते हुए रिपेार्ट शासन को भेज दी। सीएमओ की जांच रिपोर्ट में दोषी होने के कारण सर्जन डा. अरुण कुमार व स्टाफ नर्स सावित्री जायसवाल पर कार्रवाई तय मानी जा रही थी, लेकिन रिपोर्ट ऊपर जाकर दब गई। उल्टे स्टाफ नर्स सावित्री जायसवाल को पदोन्नति देकर मैट्रर्न बना दिया गया। हालांकि नियम है कि यदि किसी के खिलाफ जांच चल रही हो तो दोषमुक्त होने तक उसे पदोन्नति नहीं मिलनी चाहिए, लेकिन रसूखदारों के दबाव में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का फरमान व नियम दोनों दब गया। सीएमओ डा.सुशील कुमार का कहना है कि जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी, लेकिन उसका परिणाम पता नहीं चला। फिलहाल डिप्टी सीएम से निराश हो चुकी नीलम को अब नए जिलाधिकारी महेंद्र कुमार से न्याय की उम्मीद जगी है कि वह दोनों संवेदहीन कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कराएंगे।

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