बलरामपुर : सावन माह की शुरुआत इस बार रविवार से होना अच्छा संयोग माना जा रहा है। रविवार को सावन माह की शुरुआत व रविवार को ही समापन होगा, जिसे विद्वान आध्यात्मिक दृष्टि से शुभ बता रहे हैं। पहले दिन सुबह से ही शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु जुट गए। कोरोना के कारण मंदिरों में भीड़ न हो, इसके लिए विशेष इंतजाम किए गए। शारीरिक दूरी का ध्यान रखकर श्रद्धालुओं को जलाभिषेक के लिए मंदिरों में प्रवेश दिया गया। श्रद्धालु शिवलिग पर बेलपत्र, फूल, दुग्ध, भस्म, भांग, धतूरा, मीठा अर्पित कर पूजन किया। पहले सोमवार को लेकर भी शिवमंदिरों में विशेष तैयारी की गई है।

नगर स्थित प्राचीन झारखंडी शिव मंदिर पर जलाभिषेक के लिए विशेष तैयारियां की गई है। मंदिर में एक बार में अधिक लोगों को प्रवेश नहीं दिया गया। भीड़ अनियंत्रित न हो, इसके लिए पुलिसकर्मी तैनात रहे। हरिहरगंज के निकट गिधरैंया स्थित रेणुकानाथ शिव मंदिर, धर्मपुर स्थित झारखंडेश्वर महादेव मंदिर, राजापुर भरिया जंगल स्थित जंगली नाथ, उतरौला के दु:खहरण नाथ, पचपेड़वा स्थित शिवगढ़ धाम में भी शारीरिक दूरी के अनुपालन के साथ जलाभिषेक व पूजन-अर्चन की गई। बेलपत्र का है विशेष महत्व :

पंडित बजरंगी प्रसाद के मुताबिक धार्मिक पुराणों के अनुसार श्रावण मास में शिवजी को एक अखंड बेलपत्र चढ़ाने से तीन जन्मों के पापों का नाश होता है। साथ ही भोलेनाथ को कच्चा दूध, सफेद फल, भस्म, भांग, धतूरा, श्वेत वस्त्र अधिक प्रिय है। श्रावण मास में शिवपुराण, शिव कवच, शिव चालीसा, शिव पंचाक्षर मंत्र, शिव पंचाक्षर स्त्रोत, महामृत्युंजय मंत्र का पाठ एवं मंत्र जाप करने से मनुष्य के सारे पापों का नाश होता है।

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