-सेवा के लिए जान की परवाह नहीं:

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पाजिटिव होने के बाद भी लक्ष्मी ने नहीं हारी हिम्मत, बच्चे को साथ लेकर ड्यूटी निभा रहीं शशि

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पवन मिश्र, बलरामपुर :

संक्रमण का खतरनाक दौर चल रहा है। सबको अपने जान की पड़ी है। पहले खुद बचें और फिर अपनों को बचाने में जुटे सभी लोगों के बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इंसानियत, चिकित्सा व सेवा के फर्ज को ज्यादा अहमियत देकर दूसरों की जिदगी बचा रहे हैं। महामारी को चुनौती दे रहे इन्हीं योद्धाओं में शामिल हैं नर्स, जो रिश्तों व घर की जिम्मेदारी से अधिक चिकित्सा धर्म को अधिक अहमियत देकर मरीजों की सेवा कर रही हैं। किसी नर्स का दुधमुंहा बच्चा कुपोषित है, तो किसी के ऊपर पत्नी, बहू, मां, बेटी का कर्ज बाकी है। इन रिश्तों से जुड़े लोग संकट की घड़ी में अपनों को पुकार रहे हैं, लेकिन स्टाफ नर्स चाहकर भी यह फर्ज नहीं निभा पा रहे हैं। मां बेटे ने साथ लड़ी कोरोना से जंग:

-संयुक्त अस्पताल में स्टाफ नर्स लक्ष्मी मिश्रा साढ़े तीन माह के बच्चे की मां भी है। उसने बताया कि महामारी आई तो पति आनंद मिश्र ने घर रहने की सलाह दी। इस पर उसने कहा कि यह परिवार ही नहीं समाज के प्रति भी जिम्मेदारी निभाने का समय है। वह अपने दुधमुंहे बच्चे को पालने में छोड़ संक्रमितों की देखभाल में जुट गई। इस दौरान वह खुद पाजिटिव हो गई। मेमोरियल अस्पताल में तैनात शशि शुक्ला अपने बच्चे के साथ यहां ड्यूटी करती है, दोनों स्वस्थ भी हैं लेकिन डर लगा रहता है।

नहीं कर पाई नाना का अंतिम दर्शन:

-मेमोरियल अस्पताल में तैनात नर्स उपासना तिवारी नाना के अंतिम दर्शन नहीं कर पाई। वह कहती हैं कि जीवन भर इस बात का दु:ख रहेगा, लेकिन इस बात का सुकून भी है कि उसकी सेवा से किसी की जिदगी बच रही है। सीएमओ डा.विजय बहादुर सिंह का कहना है कि कई चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी निस्स्वार्थ भाव से मरीजों की सेवा में जुटे हैं, जो सुखद है।