बलरामपुर: कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों को सौर ऊर्जा से संतृप्त करने की मंशा खटाई में पड़ती नजर आ रही है। ऐसे में, किशोरियों को सोलर लाइट की दूधिया रोशनी व वाटर प्यूरीफायर का शुद्ध पानी नसीब नहीं हो पा रहा है।

कार्यदायी संस्था अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (इरेडा) ने केजीबीवी नगर क्षेत्र में सोलर पैनल लगाने के बाद नीचे बैट्री व मशीन के तार नहीं जोड़े। वार्डन के मुताबिक कनेक्शन जोड़ने के लिए मेनबाक्स तक सप्लाई पहुंचाने में करीब छह-सात हजार रुपये का खर्च आ रहा है। इसे कार्यदायी संस्था वहन करने को तैयार नहीं है। केजीबीवी देहात क्षेत्र में सोलर पैनल लगाकर कनेक्शन तो कर दिया गया, लेकिन दो माह से ट्रिपिग की समस्या के कारण शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में, यहां सोलर पैनल महज शोपीस बना हुआ है।

नीति आयोग के पिछड़े जिलों में शुमार होने के कारण यहां शिक्षा की तस्वीर बदलने को भारत सरकार व प्रदेश सरकार प्रयासरत हैं। मिशन शक्ति के आगाज के बाद बेटियों को हर संभव सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में केजीबीवी स्कूलों को सोलर ऊर्जा से लैस करने की कवायद की गई है।

प्रत्येक केजीबीवी में करीब 12 लाख रुपये से संयंत्र लगाए गए हैं, लेकिन कार्यदायी संस्था व वार्डन की नूराकुश्ती में योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। केजीबीवी नगर क्षेत्र की वार्डन सुधा मिश्रा ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से सीढि़यों के नीचे बैट्री व संयंत्र रखा गया है। मेन बाक्स से कुछ दूर है। आपूर्ति के लिए यहां तक तार खींचकर कनेक्शन में करीब छह-सात हजार रुपये का खर्च आना है। कार्यदायी संस्था करने को तैयार नहीं है।

वहीं, केजीबीवी देहात की वार्डन शीरी हसन ने बताया कि जून में सोलर पैनल व संयंत्र लगा है, लेकिन अब तक निष्प्रयोज्य है। वोल्टेज की समस्या बताकर संस्था के लोग पल्ला झाड़ रहे हैं।

छह स्कूलों में लगे सोलर पैनल:

केजीबीवी नगर क्षेत्र, देहात, श्रीदत्तगंज, उतरौला, गैंड़ासबुजुर्ग व रेहराबाजार में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। हालांकि कुछ तकनीकी खामियों के कारण अभी इनका संचालन शुरू नहीं हो सका है। हाईवोल्टेज, तो कहीं कनेक्शन की दिक्कत आ रही है। इसे शीघ्र दूर करने का दावा कार्यदाई संस्था के लोग कर रहे हैं।

जल्द शुरू कराया जाएगा सोलर पैनल:

बीएसए डा. रामचंद्र का कहना है कि जिन केजीबीवी में संयंत्र लग गए हैं, उन्हें जल्द शुरू कराया जाएगा। इसके लिए कार्यदायी संस्था के लोगों से वार्ता की जाएगी।

Edited By: Jagran