बलरामपुर: गरीबी से जूझ रहे जिले में किसानों की दशा सुधारने की जिम्मेदारी यहां बेटियां भी उठा रहीं हैं। सदर, श्रीदत्तगंज, उतरौला, रेहराबाजार, तुलसीपुर, गैंसड़ी ब्लाकों में ग्राम पंचायतवार तैनात 300 बेटियां हैं, जो गांव-गांव जाकर उन्नतशील किसानी के ढंग सिखा रही हैं।

खास बात यह है कि वह किसानों को न केवल कम लागत में उन्नत खेती के तरीके बता रहीं हैं, बल्कि भूगर्भ के गिरते जल स्तर को देखते हुए कम पानी व कम लागत में अधिक फसल उत्पादन के तरीके बता रही है। पलेवा की जगह नमी वाले खेत में धान की नर्सरी लगाने, क्यारी बनाकर धान की सिचाई, मचान विधि से सब्जी की खेती समेत कई आधुनिक तरीकों से खेती करने की जानकारी देने के साथ ही बेटियां जरूरत पड़ने पर किसानों की वैज्ञानिकों से आनलाइन रूबरू भी करा रही हैं। यही नहीं, वह कृषि विभाग समेत अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने में अहम भूमिका अदा कर रही हैं।

एक बीघे में उगाई 46 हजार की सब्जी:

बेटियों व महिलाओं के जागरूकता का परिणाम रहा कि रेहरा में नयानाथ नगर में मचान विधि से महिला किसान गीता मौर्या ने एक बीघे में 46 हजार की सब्जी बेंच डाली। यहां किसानों को जागरूक करने का दायित्व संभाल रही दयावती ने बताया कि वह किसानों को साल भर में चार फसल लेने के तरीके सिखाती है। महिला किसान गीता ने एक बीघा खेत में ऊपर लौकी व तरोई तथा नीचे प्याज की फसल उगाई। मचान निर्माण में उसके 20 हजार रुपये खर्च हुए, लेकिन 46 हजार की सब्जी तैयार की।

गैंसड़ी के लठावर में कुसुम मौर्य खेती के आधुनिक तरीके सिखा रहीं हैं। वह गंगोत्री समेत 200 से अधिक महिला किसानों को लाभ लेने के लिए प्रेरित कर चुकी है। खेती में जागरूकता लाने के लिए कार्य कर रही एक निजी संस्था के प्रबंधक राजीव मिश्र का कहना है कि जिले में 300 बेटियां किसानों को जागरूक कर रही हैं, जिससे स्थिति सुधर रही है।

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