जागरण संवाददाता, बलिया : वर्ष -1992 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का सपना संजोए कार सेवा करने पहुंचे। हम सभी के मन में उत्साह व उमंग था। बस, एक ही मकसद था किसी तरह मस्जिद तक पहुंच कर रामलला के मंदिर निर्माण में सहयोग कर सकूं। इसके लिए दो दिन पहले से ही यहां से कार सेवक निकल चुके थे। यहां से जाते समय उनके अंदर गजब का उत्साह व जोश था लेकिन मस्जिद गिरने के बाद आते वक्त पुलिस के भय के कारण छुपकर किसी तरह से घर पहुंचे। अयोध्या पहुंचने के लिए कारण सेवकों को अस्सी किमी तक पैदल चलना पड़ा था।

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शहर से सटे सलेमपुर निवासी राजीव मोहन चौधरी ने बताया कि कार सेवा के लिए हम सभी दो दिन पहले ही बलिया से ट्रेन से निकल गए। इसके बाद फैजाबाद के पास उतर गए। हम सभी वहां से पैदल ही अयोध्या के लिए निकल गए। बीच में एक दिन ठहराव भी लेना पड़ा। अस्सी किलोमीटर की दूरी पैदल यात्रा करने के बाद हम सभी अयोध्या पहुंच गए। वहां पहुंचने के बाद गजब का उत्साह व जोश था। लोगों के मन में बस एक ही संकल्प था, किसी तरह से मंदिर तक पहुंचा जाए। हम भी प्रयास किए लेकिन भीड़ के दबाव में वहां तक पहुंच नहीं सके। मस्जिद गिरते ही बवाल हो गया। हम सभी वहां से जैसे -तैसे निकल कर भागे। जो साधन मिला उसे पकड़ कर बलिया अपने घर पहुंचे। पुलिस का तांडव उस समय बढ़ गया था।

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आवास विकास कालोनी में रहने वाले देवेंद्र यादव ने बताया कि कार सेवा के लिए अति उत्साह व जोश के साथ हम सभी अयोध्या पहुंच गए। वहां का ²श्य पूरी तरह से उत्साह से लबरेज था। हर कोई जय श्रीराम का नारा लगा रहा था। देश के कोने-काने से कार सेवक पहुंचे थे। अयोध्यावासी भी पूरी तरह से उत्साहित थे। वे कार सेवकों की मदद भी कर रहे थे। मस्जिद गिरने के बाद तो माहौल पूरी तरह से गर्म हो गया। हर कोई इधर-उधर भागने लगा। हम सभी साथी भी अलग-अलग हो गए, जिसको जो साधन मिला पकड़ कर अपने-अपने घर निकल गए। पुलिस भी कार सेवकों की तलाश कर रही थे। अब भी मौका मिलेगा तो उसी जोश के साथ जाएंगे।

Posted By: Jagran

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