जागरण संवाददाता, बलिया: मौसम का मिजाज एक बार फिर बदल गया है। शुक्रवार को पूरे दिन आसमान में बादलों का जमावड़ा लगा रहा। बादलों की वजह से भगवान सूर्य के दर्शन तक नहीं हुए। वहीं लगातार पछुआ पवन का दबदबा बढ़ता जा रहा है। मौसम की रंगत को देखकर मौसम विज्ञानी बारिश की संभावना भी जता रहे हैं। पिछले तन दिनों से जहां मौसम का मिजाज लगातार तल्ख होता जा रहा था वहीं शुक्रवार को एक बार फिर मौसम ने करवट ली। सायंकाल बूंदाबांदी संग मौसम परिवर्तन से जहां ठंड के लौटने की संभावना भी बढ़ गई है वहीं बादलों की आवाजाही ने बारिश की संभावना को प्रबल कर दिया है।

बादलों की वजह से शुक्रवार को दिन का अधिकतम अधिकतम तापमान जहां 15 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया सामान्य से 3.3 डिग्री कम रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 13.5 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 6.3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। इसके अलावा सापेक्षिक आ‌र्द्रता अधिकतम 98 प्रतिशत व सापेक्षिक आ‌र्द्रता न्यूनतम 80 प्रतिशत रही। जबकि हवा की गति 5.3 किमी/ घंटा रिकार्ड की गई। मौसम के बदलते रुख को देखकर दलहनी व तिलहनी फसलों के कश्तकारों की बेचैनी बढ़ गई है। खास कर उन किसानों के जिनकी फसल में फूल लग गया है। मौसम विभाग के पुर्वानुमान के अनुसार अगले 24 घंटे में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने व हल्की वर्षा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि हवा के दबाव वर्षा की संभावना को बल नहीं प्रदान कर रहा है फिर भी अगले 36 घण्टे तक मौसम का रुख यही रहने का अनुमान है।

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मौसम के बदले रूख से अन्नदाता परेशान

मौसम के रुख को देखकर जहां किसान परेशान हैं वहीं विशेषज्ञों को मानना है कि बारिश से कुछ विशेष नुकसान नहीं होगा। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक प्रो रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि बारिश गेहूं की फसल के लिए लाभदायक साबित होगी। वहीं दलहनी व तिलहनी फसलों के काश्तकारों को भी परेशान होने की जरुरत नहीं है। जिन फसलों मे फल व फली लग गई है उनके लिए बारिश जरुर नुकसानदायक होगी। वहीं मौसम ठंडा होने से आलू की फसल में झुलसा रोग का प्रभाव बढ़ सकता है। किसान भाइयों को इससे बचाव का प्रबंध करना चाहिए। इसके लिए इंडोफिल एम-45 का प्रयोग लाभदायक होगा।

Posted By: Jagran

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