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गंगा और सरयू की लहरें बल‍िया में बनी अभ‍िशाप, लहरों में दफन हो गए लोगों के घर-आंगन

By Lavkush Singh Edited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 03 Nov 2026 05:05 PM (IST)

बलिया में गंगा और सरयू नदी की कटान से सैकड़ों घर और हजारों हेक्टेयर जमीन नदी में समाहित हो गई ...और पढ़ें

बलिया में गंगा-सरयू की कटान ने छीने घर-आंगन, हजारों परिवार बेघर।

बलिया में गंगा-सरयू की कटान ने छीने घर-आंगन, हजारों परिवार बेघर।

HighLights

  1. बलिया में गंगा-सरयू की कटान से भारी तबाही।

  2. 128 घर और 1400 हेक्टेयर जमीन नदी में समाई।

  3. हजारों परिवार बेघर, पुनर्वास की आस में।

लवकुश सिंह, जागरण बलिया। कल तक जहां गांव की गलियों में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, घरों के आंगन में जीवन मुस्कुराता था और खेतों में लहलहाती फसलें भविष्य के सुनहरे सपने बुनती थीं, आज वहां गंगा की लहरें इठलाती हैं। जिन चौखटों पर कभी अपनों के लौटने की राह देखी जाती थी, वे चौखटें अब नदी की गहराइयों में गुम हो चुकी हैं।

घरों के अवशेष तक नहीं बचे हैं। उजड़े आशियानों की यादें ही लोगों के पास रह गई हैं। यह किसी कहानी का दुखांत नहीं, बल्कि बैरिया तहसील के गोपालनगर टांड़ी, बांसडीह के भोजपुरवा व महराजपुर गांव की हकीकत है, जहां नदी की कटान ने लोगों से उनकी जमीन ही नहीं, पीढ़ियों की यादें और जीने का सहारा भी छीन लिया है।

सिंचाई विभाग बाढ़ खंड की ओर से हर साल लगभग 100 करोड़ रुपये कटान रोकने के लिए जिले में खर्च किए जाते हैं, लेकिन उससे भला होता नहीं दिख रहा है। इस वर्ष बांसडीह तहसील में 49 और बैरिया तहसील क्षेत्र में 79 कुल 128 मकान नदी में गिरे हैं। 4500 किसानों को भी क्षति का सामना करना पड़ा है।

उनकी 1400 हेक्टेयर जमीन बाढ़ व कटान से प्रभावित हुई है। किसी की फसल नष्ट हुई तो किसी के जीने का साधन जमीन ही नदी में समाहित हो गई। घर की छत खो चुके परिवार अब इस इंतजार में हैं कि उन्हें दोबारा बसने के लिए जमीन मिलेगी, लेकिन इस दिशा में कोई पहल होती नहीं दिख रही है।

139 घरों की बिखर गई व्यवस्था

सुरेमनपुर दियरांचल क्षेत्र के गोपालनगर टांड़ी के जीउत यादव, गणेश यादव, मनजीत कुमार यादव ने बताया कि सात किलोमीटर लंबाई में नदी अभी भी कटान कर रही है। दो वर्षों में 139 घर कटान में गिर गए हैं। बाढ़ खंड के अधिकारी या जनप्रतिनिधि केवल आश्वासन देकर पीड़ा को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।

भोजपुरवा व महराजपुर में बची हैं सिर्फ यादें

बांसडीह के भोजपुरवा और महराजपुर में तीन माह पहले तक गांव गुलजार था। भोजपुरवा में 49 और महराजपुर में 20 मकान लोग नदी में घर गिरने से पहले स्वयं के हाथों मकान तोड़कर सुरक्षित स्थान पर चले गए। रामयश, विनोद, विजेंद्र आदि ने बताया कि अब नए सिरे से दुनिया बसानी है। ऐसा लग रहा कि कटान ने पूरे संसार को उजाड़ दिया है।

बोले कटान पीड़ित

-जिस घर में बच्चे बड़े हुए, जिस जमीन पर खेती होती थी, वह सरयू में समा गया। अब बसने के लिए जमीन मिल जाए तो बड़ी सहूलियत होगी।-दशरथ यादव, गोपालनगर।

-हम लोगों ने बड़ी मेहनत से घर बनाया था, लेकिन सरयू की कटान ने सब कुछ खत्म कर दिया। अब सिर छिपाने के लिए स्थायी जगह की तलाश है।-रामजी यादव, गोपालनगर।

-तीन महीने पहले तक हमारा गांव आबाद था। घर व जमीन गिरने के बाद भी गांव छोड़ने को जी नहीं कर रहा है। यहां से हमारी यादें जुड़ी हैं।-रीता देवी, महराजपुर।

-घर सिर्फ ईंट, मिट्टी और छत से नहीं बनता, उसमें परिवार की यादें और कई पीढ़ियों की मेहनत जुड़ी होती हैं। कटान ने सबकुछ खत्म कर दिया है।-नीतू देवी, महराजपुर।

दोबारा सर्वे कराया जा रहा है। जिनके भी घर गिरे हैं या फिर नुकसान हुआ है उनको नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।

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ज्ञानेेंद्र सिंह, जिलाधिकारी, बलिया।

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