यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 10, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जल में मानक से ज्यादा आर्सेनिक, हर घर में बने रोगी
जागरण संवाददाता मझौवा (बलिया) जिले के 310 गांवों के भूजल में मानक से अधिक आर्सेनिक होने

जागरण संवाददाता, मझौवा (बलिया) : जिले के 310 गांवों के भूजल में मानक से अधिक आर्सेनिक होने की पुष्टि होने के कई साल बाद तक भी जिला प्रशासन संबंधित इलाके के लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया करा सका। इन गांवों में घर-घर के लोग रोगी बनते जा रहे हैं। कई घरों में तो पूरा परिवार ही तबाह हो चला है। बेलहरी ब्लाक के गंगापुर ग्राम पंचायत में तिवारी टोला है, यहां 350 परिवारों में कोई ऐसा घर नहीं जो आर्सेनिक के चलते परेशान न हो। इस पंचायत के दुर्जनपुर की संगीता पुत्री सुधा यादव की जिदगी ही तबाह हो गई है। 24 वर्ष की उम्र ही वह न ठीक से चल पाती हैं, न कुछ बोल पाती है। युवती के पिता बताते हैं कि उन्होंने अपनी पुत्री को बीएचयू तक में दिखाया। बीएचयू के चिकित्सकों ने भी कहा कि आर्सेनिक के चलते ही समस्या बढी है। इसी परिवार के पप्पू यादव की मृत्यु 2018 में हो गई। दुर्जनपुर गांव रमेश यादव पेट से परेशान हैं। सात वर्षों से अपना उपचार करा रहे हैं, लेकिन कोई राहत नहीं है। रामगढ़ के दुकानदार पारसनाथ पटेल का पूरा परिवार प्रभावित है। किसी के शरीर पर चकत्ते बने हैं तो किसी का हाथ पैर फटना लिवर में खराबी, कैंसर, पथरी, टीवी, आदि की बीमारी है।
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2000 में हुई आर्सेनिक की जानकारी
गांव के लोगों को वर्ष 2000 में आर्सेनिक की जानकारी हुई। यादवपुर मेडिकल कॉलेज कोलकाता की टीम पहुंची थी। टीम चौबे छपरा के पेयजल की जांच तो भूजल में मानक से ज्यादा आर्सेनिक की पुष्टि की। चंडीगढ़ विश्वविद्यालय व आगरा विश्वविद्यालय की मेडिकल टीम, बीएचयू के छात्र और नई दिल्ली से पर्यावरणविद सुनीता नारायण की टीम आदि ने भी जांच के उपरांत पाया कि यहां की स्थिति अत्यधिक खराब है।
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उपाय के नाम पर बनी पानी टंकी
विशेषज्ञों की टीम ने इसका एकमात्र उपाय स्वच्छ पेयजल बताया था। गांव में 1300 फीट बोरिग कर पानी टंकी का निर्माण कराया गया, लेकिन 3600 हजार लीटर क्षमता वाली यह टंकी मात्र दो घंटे ही लोगों को पानी दे पाती है। उसके बाद लोग पुन: अपने हैंडपंप से वहीं मानक से ज्यादा आर्सेनिकयुक्त पानी पीने को विवश होते हैं।
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100 से 130 पीपीबी है आर्सेनिक की मात्रा
गंगापुर ग्राम पंचायत में आर्सेनिक की मात्रा 100 से 130 पीपीबी (माइक्रोग्राम प्रति लीटर) से अधिक है। डब्लूएचओ का मानक 10 पीपीबी है। सरकार 50 पीपीबी के ऊपर के आंकड़े को खतरनाक मानती है। चिकित्सकों के अनुसार यह स्थिति भयानक है। यही कारण है कि भारी संख्या में लोग आर्सेनिक के कारण रोगी बनते जा रहे हैं।
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जिले में हमेशा जांच होते रहती है। यहां 100 से 500 पीपीबी तक आर्सेनिक की माता मिल रही है। बैरिया क्षेत्र में 80 फीसद हैंडपंपों में मानक से ज्यादा आर्सेनिक मिला है। अब 400 से 500 फीट नीचे के भूजल में ही आर्सेनिक नहीं मिल रही है।
-- रामबिहारी सिंह, केमिस्ट, जल निगम, बलिया
