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कराटे के हुनर से नारी सशक्तीकरण की मिसाल बनीं अंजलि, बलिया की 35 बेटियों को बनाया मेडलिस्ट

Published: Sat, 31 Oct 2026 06:21 PM (IST)

बलिया की अंजलि सिंह ने कराटे के अभ्यास को नारी सुरक्षा और महिला सशक्तीकरण के अभियान में बदल दिया है। ...और पढ़ें

कराटे के हुनर से नारी सशक्तीकरण की मिसाल बनीं अंजलि।

कराटे के हुनर से नारी सशक्तीकरण की मिसाल बनीं अंजलि।

HighLights

  1. अंजलि सिंह ने कराटे से नारी सशक्तीकरण का अभियान चलाया।

  2. बलिया की 35 बेटियों को कराटे में पदक विजेता बनाया।

  3. सरकारी योजनाओं से महिलाओं को आत्मरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहीं।

जागरण संवाददाता, बलिया। कुछ लोग अपनी कामयाबी से पहचान बनाते हैं, जबकि कुछ अपने संघर्ष और समर्पण से दूसरों की जिंदगी में नई रोशनी भरते हैं। बलिया के रतसर गांव निवासी स्व. मनीष आनंद सिंह की बेटी अंजलि सिंह ऐसी ही प्रेरणादायी शख्सियत हैं, जिन्होंने कराटे के अभ्यास को नारी सुरक्षा और महिला सशक्तीकरण के अभियान में बदल दिया है।

इनका उद्देश्य बेटियों को केवल आत्मनिर्भर बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें इतना आत्मविश्वासी और सक्षम बनाना है कि वह हर परिस्थिति का डटकर सामना कर सकें। उनके प्रयासों से अब तक करीब 35 बेटियां कराटे में मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं।

प्रारंभिक से लेकर स्नातक तक की शिक्षा जनपद में ग्रहण कर पुणे यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में एमए करने वालीं अंजलि ने वर्ष 2004 में कराटे सीखना शुरू किया था। उस समय उन्होंने शायद ही सोचा होगा कि उनका यह शौक आगे चलकर सामाजिक बदलाव का माध्यम बनेगा। इनके पिता मनीष आनंद सिंह पहले कराटे सीखे थे, उन्हीं से अंजलि को प्रेरणा मिली कि छात्राओं को भी सिखाना चाहिए। वर्ष 2017 से उन्होंने कराटे के क्षेत्र में अपनी सक्रिय पहचान बनानी शुरू की।

उस दौर में जिले में महिला कराटे खिलाड़ियों की संख्या काफी कम थी। तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और खिलाड़ी के साथ प्रशिक्षक के रूप में भी अपनी भूमिका निभानी शुरू कर दी। स्कूलों और महाविद्यालयों में शिविर आयोजित कर छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने लगीं। उनके प्रशिक्षण का परिणाम भी सामने आने लगा है।

अब तक करीब 35 बेटियां विभिन्न प्रतियोगिताओं में पदक हासिल कर चुकी हैं। इनमें सिद्धि ने वर्ष 2022 में गोल्ड मेडल जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई, जबकि प्रिया ने वर्ष 2025 में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल हासिल किया।

आत्मरक्षा के साथ सरकारी योजनाओं के प्रति भी कर रहीं जागरूक

अंजलि का मानना है कि बेटियों को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका उन्हें आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाना है। वह कहती हैं कि सुरक्षा किसी की कृपा नहीं, हर बेटी का अधिकार है। वर्ष 2024 से वह महिला कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश के अंतर्गत हब फार इंपावरमेंट आफ वूमेन (एचईडब्ल्यू) में जिला मिशन समन्वयक हैं।

इस दायित्व के तहत वह मिशन शक्ति, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, बाल विवाह उन्मूलन, महिला अधिकारों और विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं को जागरूक कर रही हैं।

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