जागरण संवाददाता, बलिया : सूबे की योगी सरकार ने बिजली बिल को 12 फीसद तक महंगा कर उपभोक्ताओं को तगड़ा झटका दिया है। बिजली दरों में वृद्धि पर मची हाय-तौबा के बीच अघोषित बिजली कटौती जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। वैसे तो सरकार ने शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे व तहसील तथा ग्रामीण इलाकों में क्रमश: 20 व 18 घंटे विद्युत आपूर्ति का फरमान जारी कर रखा है लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद से स्थिति बद से बदतर हो गई है। न तो शहरों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल पा रही और न ही ग्रामीण क्षेत्र ही दूधिया रोशनी से रोशन हो पा रहे हैं।

सरकार के सारे दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। आश्विन माह की चिपचिपाती गर्मी व बिजली की आंख-मिचौली से लोग काफी परेशान हैं। शहर से लेकर गांव तक में बिजली के हाहाकार मचा है बावजूद खोखले दावे के साथ पीठ थपथपाने का सिलसिला जारी है। कभी विद्युत उपकेंद्रों में कराए जा रहे कार्य का हवाला देकर घंटों कटौती की जा रही तो कभी ट्रांसफार्मर जलने व जर्जर तारों की वजह से हफ्तों बिजली का दर्शन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सरकार का फैसला लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। लोग सरकार के इस फैसले के विरुद्ध खड़े होते दिख रहे हैं। लोगों का कहना है कि शहरी घरेलू उपभोक्ताओं को 50-60 पैसे प्रति यूनिट ज्यादा बिल वसूलने का फरमान जारी किया गया है। वहीं फिक्स चार्ज भी 10 रुपये प्रति किलोवाट बढ़ा दिया गया है। सबसे खराब स्थिति तो अनमीटर्ड ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं की है। इनसे वसूले जाने वाले बिजली बिल में 25 फीसद की वृद्धि की गई है। ऐसी स्थिति में पहले जिन लोगों को 400 रुपये प्रतिमाह देना पड़ रहा था अब 500 रुपये भुगतान करना होगा।

पूर : रतसर फीडर से संबद्ध सौ से अधिक गांवों को पिछले एक माह से पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। इससे लोगों में काफी आक्रोश है। वहीं विभागीय तकनीकी खामियों का हवाला देकर इससे बचने का प्रयास कर रहे हैं। बिजली कटौती के चलते जहां आमजन गर्मी से बिलबिला रहे हैं वहीं बारिश न होने से धान की फसल सूखने की कगार पर हैं। क्षेत्र के पूर, पकड़ी, उससा, सतरसड़, मिश्रौली, जगदरा, खेजुरी, खड़सरा, अखैनी, जिगिरसंड, बड़सरी, जनुआन समेत दर्जनों गावों की हालत ऐसी है कि 18 घंटे की घोषणा वाले इन क्षेत्रों में महज पांच घंटे बिजली मिल पा रही है। हालांकि विभागीय निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक बिजली देने की बात कर रहें हैं लेकिन हकीकत में स्थिति इसके ठीक विपरीत है।

रसड़ा : विद्युत तारों व खंभों के जर्जर होने व ट्रांसफार्मर जलने की वजह से विद्युत आपूर्ति बाधित होना आम बात हो गई है। सरकार के दावा 18 से 20 घंटे का है लेकिन आपूर्ति अधिकतम 10 से 12 घंटे तो हो रही है। बावजूद विभागीय शेखी बघारने से बाज नहीं आ रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल रसड़ा ब्लाक क्षेत्र में भी है। क्षेत्र के विभिन्न गांवों में बिजली की आपूर्ति इन दिनों भगवान भरोसे है। कब आएगी और कब चली जाएगी इसका कोई अता-पता नहीं है। दशकों पूर्व लगाए गए जर्जर तार व खम्भे 18 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे की हवा निकाल रहे हैं। विद्युत आपूर्ति का कोई शेड्यूल निर्धारित नहीं रह गया है। इसमें सरकार द्वारा बिजली बिल में वृद्धि करना लोगों की समझ से परे हो गया है। लोगों का कहना है कि सरकार बगैर आपूर्ति के ही ग्रामीणों से बिजली बिल वसूलने पर अमादा है। दर्जनों बार आपूर्ति बाधित होना आम बात है।

सुखपुरा : लोगों को पर्याप्त बिजली मुहैया कराने का दावा करने वाली सूबे की सरकार अपने दावे से पीछे हटती दिख रही है। क्षेत्र में निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक बिजली न मिलने से लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। दावा 18 घंटे का और आपूर्ति महज पांच से छह घंटे मिलने से उपभोक्ता काफी परेशान हैं। दशकों पूर्व लगाए गए जर्जर तार व पोल समस्या को और जटिल बना रहे हैं। चार सौ रुपये प्रति माह बिजली बिल की जगह पांच सौ रुपये प्रति माह बिजली का बिल करने वाली सरकार क ध्यान इधर नहीं है। लगातार की जा रही बिजली बिल में वृद्धि से लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। वहीं बार-बार ट्रांसफार्मर जलने से क्षेत्र के औसतन आधा दर्जन गांव हर दिन अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।

जयप्रकाश नगर : गंगा व घाघरा के बाढ़ प्रभावित इलाके के लोगों की रात अंधेरे में तो कट ही रही है वहीं बाढ़मुक्त क्षेत्रों में भी पिछले दिन से बिजली की आपूर्ति नहीं हो रही है। ऐसे में लोगों के सामने कई तरह की समस्या खड़ी हो गई है। लोगों का कहना है सरकार ने बिजली दर में वृद्धि का फरमान तो जारी कर दिया है, लेकिन आपूर्ति की मानिटरिग न होने से दिनोंदिन स्थिति खराब होती जा रही है। ट्रिपिग व लो वोल्टेज से जूझना तो यहां के लोगों के लिए आम बात है। कोई न कोई बहाना बनाकर आपूर्ति बाधित करना फीडर के कर्मचारियों का शौक बन गया है।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप