मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

प्रदीप तिवारी, बहराइच : ग्राम सचिवों की रिपोर्ट कहती है कि पीएम आवास की पात्रता रखने वाले गरीब नहीं हैं। जिले में हर गरीब का खुद के पक्के मकान का सपना साकार हो चुका है। इस रिपोर्ट पर पीएम आवास के लिए आवंटित 36 करोड़ रुपये शासन को प्रशासन ने वापस कर दिया है। इसे आंकड़ों का खेल माना जाय या सच। क्या जिले में पीएम आवास योजना के पात्र रह ही नहीं गए हैं?

केंद्र सरकार ने वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की है। वर्ष 2011 की आर्थिक, सामाजिक व जातिगत जनगणना की सूची में दर्ज गरीब योजना के हकदार होंगे। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो 75 हजार गरीब सूची में आवास विहीन रहे। तीन सालों में सभी की झोपड़ी पक्के आवास में तब्दील हो गई है। सूची में दर्ज एक भी पात्र आवास से वंचित नहीं है। वित्तीय वर्ष में 12789 आवासों का एक अरब 53 करोड़, 46 लाख 80 हजार रुपये बजट शासन से जारी किया गया था। ग्राम सचिवों की रिपोर्ट के आधार पर ग्राम्य विकास अभिकरण ने 3000 आवासों का 36 करोड़ रुपये शासन को लौटा दिया है। लौटाने की वजह पात्र गरीब न होना दर्शाया गया है। दस हजार से ज्यादा मिले अपात्र

तीन सालों में ही सूची में दर्ज लाभार्थियों के पक्के मकान से आच्छादित होने की रिपोर्ट गले से नहीं उतर रही है। अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2011 की सूची में 10 हजार से ज्यादा लोग जांच में खुद का मकान होने से अपात्र पाए गए, जिससे संख्या निरंतर घटती गई।

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1500 आवास का बजट उपलब्ध

ग्राम्य विकास विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक इस वर्ष 8500 पात्रों को आवास की पहली किस्त जारी की गई है। 1500 आवास का बजट उपलब्ध है। जांच में सामने आने पर पात्रों को तत्काल धन आवंटित किया जाएगा।

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ग्राम सचिवों की रिपोर्ट के आधार पर 3000 आवासों का बजट शासन को वापस कर दिया गया है। पर्याप्त बजट उपलब्ध है। सूची में दर्ज हर पात्र को आवास मिलेगा।

-अनिल सिंह, परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य अभिकरण, बहराइच

Posted By: Jagran

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