प्रदीप तिवारी, बहराइच :

जल प्रबंधन व पर्यटन की शिक्षा ग्रहण करने के लिए जिले के छात्रों को अब महानगरों का रुख करने की जरूरत नहीं होगी। आर्थिक तंगी भी तकनीकी शिक्षा हासिल करने में आड़े नहीं आएगी। जिले में संचालित महाविद्यालयों में यूजीसी ने पाठ्यक्रम संचालन को मंजूरी दे दी है। कॉलेज में पढ़ाई के साथ ही छात्र रोजगारपरक शिक्षा आसानी से ले सकेंगे।

भारत-नेपाल बॉर्डर से बहराइच सटा हुआ है। 551 वर्ग किमी में कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग फैला हुआ है। घाघरा, सरयू व अन्य सहायक नदियां हैं। इसको देखते हुए पीजी कॉलेजों में जल प्रबंधन व पर्यटन की शिक्षा को बढ़ावा देने का फैसला किया गया है। शासन की पहल पर 38 पीजी कॉलेज व पांच महिला पीजी कॉलेजों में शासन की पहल पर डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने यूनीवर्सिटी ग्रांट कमीशन को प्रस्ताव भेजा था। इन महाविद्यालयों को यूजीसी ने टूरिज्म व जल प्रबंधन पाठ्यक्रम संचालन को लेकर चयनित किया है। छात्र-छात्राओं को मुख्य विषयों की पढ़ाई के साथ रोजगारपरक शिक्षण ग्रहण करने में मदद मिलेगी। हालांकि कॉलेज के संस्थागत छात्र-छात्राएं ही आवेदन के लिए अर्ह होंगे। प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू हो रही है।

एक से तीन वर्षीय डिप्लोमा कोर्स

किसान पीजी कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. राजवीर सिंह कहते हैं कि यूजीसी का कदम छात्र-छात्राओं का भविष्य संवारने में मददगार साबित होगा। एक वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए सर्टिफिकेट, दो वर्षीय प्रशिक्षण पर डिप्लोमा व तीन वर्ष के लिए डिग्री दी जाएगी। यह डिग्री निजी व सरकारी नौकरियों के लिए अर्ह होगी।

एक बैच में होंगे 50 प्रशिक्षणार्थी

केडीसी में पर्यटन व जल प्रबंधन पाठ्यक्रम के लिए 50 सीटें निर्धारित की गई हैं। एक बैच संचालित होगा, जिसमें बालिकाओं को प्राथमिकता मिलेगी। पाठ्यक्रम के लिए छात्र-छात्राओं का चयन विश्वविद्यालय की ओर से गठित टीम करेगी। हालांकि पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर चयन प्रक्रिया शुरू की गई है।

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यूजीसी की ओर से तकनीकी शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। दो नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों से डिप्लोमा व डिग्री हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को भविष्य संवारने का बेहतर मौका मिलेगा।

- डॉ. एससी त्रिपाठी, प्राचार्य, किसान पीजी कॉलेज, बहराइच

Posted By: Jagran

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