3 महीने से भारत में छिपे 3 श्रीलंकाई बहराइच बॉर्डर पर गिरफ्तार, नेपाल भागने की थी तैयारी
भारत-नेपाल सीमा पर बहराइच में तीन श्रीलंकाई और एक तमिलनाडू निवासी व्यक्ति को वीजा समाप्त होने के तीन माह बाद ...और पढ़ें

नेपाल में प्रवेश करने से पहले ही एसएसबी के सक्रिय जवानों ने सभी को पकड़ा। जागरण
HighLights
बहराइच में भारत-नेपाल सीमा पर चार लोग पकड़े गए।
तीन माह पहले ही इन सभी का वीजा खत्म हो चुका था।
श्रीलंकाई नागरिक जाफना के, जो लिट्टे का गढ़ रहा है।
संतोष श्रीवास्तव, बहराइच। भारत-नेपाल सीमा से सटे एसएसबी के रज्जनवा चेकपोस्ट पर पकड़े गए श्रीलंकाई नागरिक समेत चार लोगों के वीजा खत्म होने के बाद भी तीन माह से भारत में रहने का मकसद अभी तक उजागर नहीं हो पाया है। श्रीलंकाई नागरिक जाफना के रहने वाले हैं, जो लिट्टे उग्रवादियों का कभी गढ़ माना जाता था और देश के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी की हत्या में इस गुट का मुख्य रोल था।
फिलहाल वीजा खत्म होने के बाद भी इतना महीनों से वे किसके संरक्षण में रह रहे थे और कैसे उन पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर तक नहीं पड़ी, यह बड़ा सवाल है।
पांच दिन पहले बहराइच पहुंचे श्रीलंका के जाफना निवासी अजीत कुमार, कौशल्या और प्रभाप के अलावा तमिलनाडु निवासी धर्म सुधाकर चोरी-छिपे नेपाल में दाखिल होना चाहते थे। चारों लोग बेखौफ होकर मिहींपुरवा तहसील इलाके में घूमते रहे। तीन माह पूर्व वीजा समाप्त होने के बाद भी वे सीमा पार करने की फिराक में अपना स्थान बदलकर रहते रहे।
इस बात की भनक सुरक्षा एजेंसियों को क्यों नहीं लग पाई? यह बड़ा सवाल है। चारों ने कतर्निया जंगल के रास्ते नेपाल जाने की तैयारी की, लेकिन एसएसबी की रज्जनवा चेकपोस्ट के पास जवानों ने रोक कर पूछताछ की तो इस बात का खुलासा हुआ कि सभी वीजा समाप्त होने के बाद भी भारत में छिपे हुए थे।
श्रीलंका के जाफना में इनका निवास स्थान पता चलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हुईं। कारण कुछ और नहीं, 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में शामिल लिब्रेशन टाइगर्स आफ तमिल ईलम का गढ़ भी जाफना ही रहा है। फिलहाल तीनों श्रीलंकाई नागरिक व चौथे तमिलनाडु निवासी व्यक्ति से पूछताछ कर अभी तक पुलिस किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है, क्योंकि उनकी भाषा समझने में आज की हाईटेक पुलिस भी फेल है।
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अधिकारियों की मानें तो द्विभाषीय को बुलाया गया है, जो उनसे बातचीत कर उनके भारत में छिपे रहने और नेपाल भागने की सच्चाई को उजागर कर सके। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण दुर्गा प्रसाद तिवारी ने बताया कि जल्द ही इस बात का खुलासा होगा कि चारों किस मकसद से भारत आए थे।
