बहराइच, जेएनएन। बूढ़े बरगद के वलकल पर सदियों का इतिहास लिखा है, विकट बाढ़ की करुण कहानी नदियों का सन्यास लिखा है। जनकवि अदम गोंडवी की यह लाइनें बहराइच जिले के बाढ़ व कटान पीड़ित परिवारों पर सटीक बैठती हैं। बाढ़ सालाना आपदा के तौर पर आती है। पांच महीने घाघरा नदी के तटवर्ती गांवों के लोगों को तिल-तिल सताती है। बड़ी तादाद में लोग घर-द्वार छोड़कर यायावर हो जाते हैं। पिछले दो दशक से बेलहा-बेहरौली तटबंध व घाघरा के बीच बसे 62 गांवों के करीब दो लाख से अधिक की आबादी को बाढ़ व कटान झेलना पड़ रहा है। कटान में 14 गांव राजस्व नक्शे से ओझल हो गए हैं। 

1857 के गदर के महान सेनानी व बौंडी नरेश महाराजा हरदत्त सिंह सवाई की कर्मस्थली बौंडी के ऐतिहासिक किला परिसर में उस पीपल के पेड़ के नीचे दैनिक जागरण ने सोमवार को बाढ़ व कटान के मुद्दे को लेकर चुनावी चौपाल लगाई, जिसके नीचे बैठकर लखनऊ की बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध की रणनीति बनाया करती थीं। चौपाल में यहां के लाेगों का खूब दर्द छलका। कहा कि राहुल गांधी से लेकर राजनाथ सिंह के यहां आने के बाद भी विकास का दीप मयस्सर नहीं हुआ। आजादी के 71 सालों बाद भी बाढ़ व कटान की विभीषिका से मुंह फेरे सरकारी तंत्र की उदासीनता को उजागर करती रिपोर्ट

  

न पूछो क्या गुजरती है दिल-ए-खुद्दार पर अक्सर दिलों की बात को जब हम जुबां पर ला नहीं सकते। जफा को फिर वफा की दास्तां कहना ही पड़ता है। बाैंडी व आसपास के 29 गांव घाघरा की कटान में अपनी शिनाख्त भूल गए। बौंडी एक इकाई बनकर रह गई है। सैकड़ों परिवार आज भी पुनर्वास की बाट जोह रहे हैं। तटबंध पर बंजारों की तरह जीवन-यापन कर रहे कटान पीड़ितों को पुनर्वासित करने की जरूरत है। आजादी की लड़ाई में अग्रणी रहे इस गांव में ब्लॉक की भी आवश्यकता है।  उमेश्वर पांडेय 

बाढ़ व कटान पीड़ितों के लिए शासन को पुनर्वास नीति बनानी चाहिए। बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही जलनिकासी की व्यवस्था भी होनी चाहिए। बाढ़ व कटान का स्थाई समाधान होना जरूरी है। रमेश तिवारी 

दैनिक जागरण समाचार पत्र विगत 20 वर्षों से बाढ़ व कटान की विभीषिका को प्रमुखता से प्रकाशित कर रहा है। इसी का नतीजा है कि 29 गांव कटने के बाद बौंडी में स्पर व स्टड का निर्माण किया गया, जिससे कटान पर रोक लगी। बावजूद इसके गोलागंज, कायमपुर, पिपरी, तिकुरी जैसे कई ऐसे गांव हैं, जहां हर वर्ष कटान की त्रासदी होती है। इन गांवों में भी स्पर व स्टड बनवाने की आवश्यकता है। कौशल गुप्ता 

गांवों को बचाने के लिए घाघरा नदी पर बनाए गए स्पर व स्टड को आपस में जोड़कर रिंग बांध बनाए जाने की आवश्यकता है, जिससे बाढ़ व कटान से स्थाई निजात मिल सके। बाढ़ की वजह से क्षेत्र में गरीबी का भी आलम रहता है। ऐसे में यहां के लोग आगे नहीं बढ़ पाते हैं। श्यामसुंदर त्रिवेदी, सेवानिवृत्त शिक्षक 

1955 में जब बेलहा-बेहरौली तटबंध का निर्माण हो रहा था तो यह प्रस्ताव बनाया गया था कि तटबंध व घाघरा नदी के बीच में बसे गांवों का उच्चीकरण किया जाएगा, लेकिन यह प्रस्ताव फाइलों के जाल में उलझ कर रह गया। बाढ़ से किसानों की एक छमाही फसल बहकर तबाह हो जाती है तो दूसरी छमाही की फसल बेसहारा पशुओं को भेंट चढ़ जाती है।  श्यामजी तिवारी 

अच्छा लगे तो नोट करें, बाकी नकार दें...। लखनऊ की बेगम हजरत महल ने बौंडी से अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल फूंका था। चुनाव नजदीक आते ही नेताओं द्वारा कोरे आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन कोई भी जनप्रतिनिधि बाढ़ व कटान के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेता है। बाढ़ व कटान को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाना चाहिए। श्यामसुंदर सिंह चाहत 

बाढ़ व कटान पीड़ितों की समस्याओं के निस्तारण के लिए स्थाई हल जनप्रतिनिधि नहीं खोज रहे हैं, बल्कि लाई-चना बंटवाने में अपनी वाहवाही समझ रहे हैं। सुनामी को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया है, परंतु प्रतिवर्ष लाखों की आबादी को त्रासदी देने वाली बाढ़ व कटान को आपदा घोषित नहीं किया गया है। बाढ़ व कटान की इस अंतहीन त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाना चाहिए। रिंग बांध भी बनना चाहिए। विशाल तिवारी 

जब आपदा आती है तभी राहत व बचाव के कार्य शुरू किए जाते हैं। आपदा से पूर्व यदि शासन-प्रशासन सतर्क हो जाय तो इस पर अंकुश लगाया जा सकता है। बौंडी में जलभराव की विकट समस्या बाढ़ के दौरान बनी रहती है। जलनिकासी के लिए ह्यूम पाइप डालने की जरूरत है। रमाकांत गौड़, पूर्व प्रधान 

बाढ़ व कटान क्षेत्र की एक ज्वलंत समस्या है। इसके लिए ठोस इंतजाम किए जाने चाहिए। प्रदेश व केंद्र की सरकारों को विस्तृत कार्ययोजना बनाकर बाढ़ व कटान रोकने के प्रयास किए जाने चाहिए। 20 वर्षों से चली आ रही इस विकराल समस्या के समाधान के लिए प्राथमिकता के तौर पर कार्य किया जाना चाहिए। फौरी सहायता के बजाय स्थाई निदान होना चाहिए। रामपाल आर्य, पूर्व नायब तहसीलदार  

बाढ़ व कटान से गांव को बचाने के लिए स्टड व स्पर के साथ रिंग बांध बनाया जाना चाहिए। चुनाव आते हैं तो वादे जरूर किए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद सभी वादे समय के धुंधलके में गुम हो जाते हैं। पीड़ितों को लाई, चना, गुड़ नहीं, बल्कि समस्या का स्थाई हल चाहिए। अंजनी शुक्ला  

बौंडी में एक नाला है, जो घाघरा नदी से निकलता गांव से बाहर होते हुए संस्कृत विद्यालय के किनारे से पुन: घाघरा नदी में समा जाता है। बाढ़ का पानी इसी नाले से पूरे गांव में भर जाता है। संस्कृत विद्यालय के पास स्थित पुलिया काफी ऊंची है, जिससे बाढ़ का पानी कई दिनों तक ठहरा रहता है। इस पुलिया के पास ह्यूम पाइप नीचे डाल दिया जाय तो पानी की निकास जल्दी हो जाय। बाबादीन त्रिवेदी 

बाढ़ के दौरान बौंडी कस्बा टाॅपू के रूप में तब्दील हो जाता है। आवागमन के सारे रास्ते जलमग्न हो जाते हैं। बौंडी को बेलहा-बेहरौली तटबंध को जोड़ने वाला मुख्य  संपर्क मार्ग भी नीचा है। इसके उच्चीकरण की भी आवश्यकता है। जर्जर पड़ा जरौरा पुल के निर्माण की भी जरूरत है। जाकिर

 

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