यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 02, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बहराइच Þबाल संसद' मॉडल को अपनाएंगे अमेरिकी छात्र
बहराइच : अमेरिकी छात्र-छात्राओं का दल बहराइच पहुंचा। यहां उन्होंने उप्र के तराई जिला

बहराइच : अमेरिकी छात्र-छात्राओं का दल बहराइच पहुंचा। यहां उन्होंने उप्र के तराई जिलों में विगत डेढ़ दशक से बच्चों, आदिवासियों व वनवासियों के साथ उनके अधिकारों के मुद्दों पर कार्यरत समाज कार्य संगठन द्वारा बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों को समझा व सीखा। इस दल में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के शिकागो, स्वानानोवा, कैरोलिना, न्यूयॉर्क, वियतनाम, न्यू जर्सी, बोस्टन आदि शहरों से कक्षा-12 में अध्ययनरत 13 छात्राओं व दो छात्र शामिल रहे।
शहर में देहात संस्था के मुख्य कार्यकारी डॉ.जितेंद्र चतुर्वेदी ने उनके साथ एक सीख सत्र में बहराइच जिले की संस्कृति, रहन-सहन, स्वास्थ्य, शिक्षा व समस्याओं से जुड़े पहलुओं व इनके समाधान के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। यहां के बाद अमेरिकी दल के साथ बाल संसद व एंटी-ट्रैफि¨कग एक्शन ग्रुप के नेतृत्वकर्ताओं की शिक्षा अधिकार व ¨लगगत भेदभाव के मुद्दे पर भारत-नेपाल सीमा पर रूपईडीहा के पचपकरी के पोखरा गांव में आयोजित कार्यशाला में भाग लिया। कार्यशाला में मुख्य रूप से देहात बाल संसद-लोहरा की लक्ष्मी, टेड़िया वनग्राम की संगीता, एंटी ट्रैफि¨कग एक्शन ग्रुप (आग) की फूलजहां, साक्षी, कल्पना यादव व नूरजहां ने अपने संघर्ष के अनुभव बांटते हुए कहा कि सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद भी भारतीय समाज में बालिकाओं व महिलाओं के लिए अवसरों की उपलब्धता के होते हुए भी बालिकाओं की पहुंच उन अवसरों तक नहीं बन पा रही। देहात संस्था द्वारा बाल संसद के गठन के बाद बालिकाओं के प्रति समाज की सोच में बदलाव आ रहा है। अमेरिकी छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि अमेरिका में भी कई प्रकार की विसंगतियों के बावजूद भी हम उनका सामना उस साहस के साथ नहीं कर पाते जिस साहस के साथ बहराइच के गांवों में गठित बाल संसद के बाल नेतृत्वकर्ता संघर्ष कर रहे हैं। अमेरिकी छात्र-छात्राओं ने कहा कि वे वापस जाकर बाल संसद के मॉडल को दोहराने का प्रयास करेंगे। कार्यक्रम का संचालन देहात के मुख्य कार्यकारी जितेंद्र चतुर्वेदी, अमेरिकी छात्र दल के प्राध्यापक गौतम मेढ़ ने किया।
