विजय द्विवेदी, बहराइच : बारिश और बाढ़ कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के वन्यजीवों के लिए खतरा बन गया है। जंगल के अधिकांश भागों में जलभराव होने से वन्यजीव आबादी या सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं। ऐसे में इसका फायदा वन्यजीवों के तस्कर उठा सकते हैं। वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग के सामने चुनौती बनी हुई है। हालाकि वन महकमा वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चौकस है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग 551 वर्ग किमी में फैला है। इसमें बाघ, हाथी, तेंदुए, चीतल, कांकड़, गैंडा, बारासिघा, मगरमच्छ, घड़ियाल व डॉल्फिन आदि का प्रवास है। नेपाल से सटा होने के कारण पहाड़ों पर होने वाली बारिश से नेपाल के पानी से मुर्तिहा, धर्मापुर व ककरहा रेंज के जंगल जलमग्न हो गए हैं। जंगल के कच्चे रास्तों पर पानी भरा हुआ है। पानी भर जाने से रास्ते दलदल हो गए हैं। इसकी वजह से वन विभाग की ओर से गश्त नहीं हो पा रही है। पानी भर जाने से जंगली जीव सुरक्षित ठिकाने की तलाश में जंगल से बाहर निकल रहे हैं। शिकारियों व तस्करों की निगाहें भी इन पर टिकी हुई हैं। चलाया जा रहा मानसून गश्त कतर्निया के रेंजर पीयूष मोहन श्रीवास्तव बताते हैं कि धर्मापुर व मुर्तिहा रेंज में पानी है। जंगल के कुछ स्थान ऊंचे भी हैं। ऐसे में जलभराव वाले स्थानों को छोड़कर वन्य जीव ऊंचे स्थानों पर पहुंच जाते हैं। इसके बावजूद भी मानसून गश्त की जा रही है, जिससे जानवरों को आबादी की ओर जाने से रोकने के साथ तस्करों पर भी नजर रखी जा रही है। ऑपरेशन मानसून गश्त के लिए दो टीमें बनाई गई है। एक टीम गेरुआ नदी के उस पार गश्त कर रही है तो दूसरी ने इस पार मोर्चा संभाल रखा है। शिकारियों व तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए एसएसबी जवानों की भी मदद ली जा रही है।

Posted By: Jagran

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