कैदियों के जीवन में बदलाव की नई राह, बहराइच कारागार में 835 बंदियों को दी जा रही अध्यात्म और ज्ञान की खुराक
बहराइच जिला कारागार में 835 बंदियों को अपराध के अंधेरे से निकालकर ज्ञान और अध्यात्म के उजाले की ओर ले ...और पढ़ें
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HighLights
बंदियों को धार्मिक व प्रेरक पुस्तकें पढ़ाई जा रही हैं।
835 कैदियों में सकारात्मक सोच का संचार किया जा रहा।
तनाव व अवसाद से मुक्ति दिलाकर बेहतर नागरिक बनाना।
संतोष श्रीवास्तव, बहराइच। जेल में बंदियों की जिंदगी को अपराध के अंधेरे से निकालकर ज्ञान और अध्यात्मिक के उजाले की ओर ले जाने के लिए जिला कारागार प्रशासन ने सराहनीय कदम उठाया है। बंदियों में अध्यात्मिक और मानसिक चेतना को जगाने के लिए धार्मिक और प्रेरक पुस्तकें पढाने की पहल की गई है। जिससे उन्हें नई राह पर चलाने का प्रयास किया जा सके।
जिला कारागार में कुल 835 पुरुष व महिला बंदी निरुद्ध् हैं। इनमें आध्यात्मिक और मानसिक चेतना को जगाने के लिए धार्मिक और प्रेरक पुस्तकें पढ़ाई जा रही है। जेल प्रशासन का मानना है कि इन पुस्तकों के अध्ययन से बंदियों के भीतर छिपे अपराध बोध को दूर करने और उनमें सकारात्मक सोच का संचार करने में मदद मिलेगी।
जेल अधिकारियों के मुताबिक, बैरकों से निकलकर बंदी सुबह और शाम के नियत समय में एक कमरे में बनी लाइब्रेरी में पहुंच रहे हैं। जो बंदी पढ़े-लिखे नहीं हैं, उन्हें अन्य साक्षर बंदी इन ग्रंथों की कहानियां पढ़कर सुना रहे हैं, जिसका सकारात्मक प्रभाव भी दिख रहा है।
तनाव और अवसाद से मिलेगी मुक्ति
लंबे समय तक जेल में रहने वाले कैदी मानसिक तनाव, अवसाद, चिड़चिड़ेपन का शिकार हो जाते हैं। जेल मैनुअल के सुधारात्मक दिशा निर्देशों के तहत यह कवायद शुरू की गई है। धार्मिक और दार्शनिक साहित्य का अध्यन बंदियों में मानव मस्तिक में करुणा, क्षमा, और आत्म निरीक्षण की भावना पैदा करता है।
बंदियों के जीवन में बदलाव लाने के लिए उन्हें धार्मिक पुस्तकें पढ़ने के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। उद्देश्य है कि जब वह सजा पूरी कर समाज में लौटें तो बेहतर व सुधरे हुए नागरिक के रूप में अपनी नई जिंदगी की शुरूआत कर सकें। - राजीव कुमार सिंह, जेल अधीक्षक
