बागपत, जेएनएन। दशलक्षण महापर्व के छठे दिन जिनालयों में श्रद्धालुओं ने उत्तम संयम धर्म की पूजा की। गुरुवार को धूप दशमीं का पर्व मनाया जाएगा।

श्री 1008 अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर मंडी में श्री अजितनाथ विधान का आयोजन किया गया। बुधवार सुबह पीत वस्त्रधारी जैन इंद्रगणों ने अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का गर्म प्रासुक जल से अभिषेक किया। विधानाचार्य द्वारा बोले गए मंत्र के मध्य शांतिधारा का सौभाग्य सोधर्म इंद्र प्रदीप जैन बामनौली वालों को प्राप्त हुआ। नित्य नियम पूजन में नवदेवता पूजन, दशलक्षण पूजन, सोलहकारण पूजन, अजितनाथ भगवान पूजन और नंदीश्वर दीप की पूजन की गई। ग्वालियर से पधारी संगीतकार अनुपमा जैन के गाए भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। पंडित चंद्रप्रकाश ने उत्तम संयम धर्म के विषय में विधान के मध्य प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि जिस मनुष्य ने अपने जीवन में संयम धारण कर लिया है। उसका मनुष्य जीवन सार्थक है तथा सफल है। बगैर संयम के मुक्ति वधु कोसों दूर है और आकाश कुसुम के समान है। उन्होंने कहा कि संयम आत्म नियंत्रण को कहते हैं। अपने मन,वचन और इन्द्रियों को नियंत्रित कर लेना इसी का नाम संयम है। संयम के मायने केवल अनुशासन नहीं है बल्कि आत्म नियंत्रण है। विधान में मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, अमित जैन, अरुण जैन, संजय जैन, इंद्राणी जैन, त्रिशला जैन, रश्मि जैन, डिपल जैन, सरला जैन आदि उपस्थित रहे।

उधर, श्री 1008 पा‌र्श्वनाथ मन्दिर नेहरू रोड में तेरह द्वीप महामंडल विधान के अंतर्गत पंडित नेमचंद जैन के दिशा निर्देशन में सर्वप्रथम श्री जी का प्रक्षालन अभिषेक व सौधर्म इंद्र सतेंद्र जैन, कुबेर इंद्र अमित जैन, यज्ञ नायक ऋषभ जैन, महेंद्र इंद्र अतिशय, संयम व आकाश जैन द्वारा शांतिधारा की गई। पंडित नेमचंद ने कहा कि जीवन एक गाड़ी है, जिसमें संयम रूपी ब्रेक जरूरी है। जिस तरह गाड़ी में अगर ब्रेक ना हो तो गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है। इसी तरह इंसान के जीवन में अगर संयम रूपी ब्रेक नहीं है तो वह उसका जीवन भी नरक के समान हो जाता हैं। इसीलिए जीवन मे संयम का होना बहुत जरूरी है। कार्यक्रम में सतेंद्र, नरेश, अनिल, अमन, जयपाल, मुकेश, निरंजन, आदिश आदि थे।

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